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एमपी विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित: 10 दिनों में 62 घंटे चली कार्यवाही, ई-बजट पर रही विशेष छाप

10 दिन, 62 घंटे की कार्यवाही और ई-बजट; गो संरक्षण से लेकर शिक्षा-स्वास्थ्य तक पर हुई विस्तृत चर्चा

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को अपनी निर्धारित अवधि के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। 16 फरवरी से शुरू होकर 27 फरवरी तक चले इस 10 दिवसीय सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही कुल 62 घंटे तक चली। इस सत्र की सबसे बड़ी विशेषता ‘ई-विधान’ परियोजना रही, जिसके तहत वर्ष 2026-27 का पूरा बजट सदस्यों को टैबलेट्स पर डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया गया।

विधायी और वित्तीय उपलब्धियां

सदन ने इस सत्र के दौरान वर्ष 2026-27 के मुख्य बजट को पारित करने के साथ-साथ वर्ष 2025-26 की तृतीय अनुपूरक मांगों को भी अपनी स्वीकृति प्रदान की। सत्र के दौरान वित्तीय कार्यों के अलावा लोक महत्व के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

सत्र के प्रमुख आंकड़े: एक नजर में

सत्र के दौरान सदस्यों की सक्रियता और सदन की उत्पादकता इन आंकड़ों से स्पष्ट होती है:

  • कुल प्रश्न: 3,478 (1,750 तारांकित और 1,728 अतारांकित)।

  • सूचनाएं: ध्यानाकर्षण की 902 और शून्यकाल की 337 सूचनाएं प्राप्त हुईं।

  • याचिकाएं: कुल 771 याचिकाएं सदन के पटल पर आईं।

  • चर्चा का समय: राज्यपाल के अभिभाषण पर 9 घंटे 5 मिनट और बजट पर 1 घंटा 44 मिनट तक सामान्य चर्चा हुई।

  • विधेयक: एक शासकीय और छह अशासकीय विधेयक पारित किए गए।

जनहित के मुद्दों पर रहा जोर

भोजनावकाश स्थगित कर सदन ने गो संरक्षण, आवारा कुत्तों की समस्या, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ को लेकर सदन में महत्वपूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किए।

पिछले 5 वर्षों में विधानसभा की स्थिति (तुलनात्मक चार्ट)

आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में यह सत्र बैठकों के लिहाज से काफी प्रभावी रहा है।

विधानसभा सत्र निर्धारित अवधि (दिन) कुल बैठकें
फरवरी 2026 (वर्तमान) 12 10
जुलाई-अगस्त 2025 10 8
मार्च 2025 9 9
जुलाई 2024 14 5
फरवरी-मार्च 2023 13 13
मार्च 2022 13 8
फरवरी-मार्च 2021 23 13

विशेष तथ्य: 16वीं विधानसभा के इस बजट सत्र में डिजिटल इंडिया की झलक दिखी, जहाँ ई-बजट के माध्यम से कागजों के उपयोग को न्यूनतम करने का प्रयास किया गया।

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