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23% डॉक्टरों की कमी, जिला स्वास्थ्य विभाग के पास एक भी स्किन स्पेशलिस्ट नहीं

 

भोपाल। जिला स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित अस्पतालों में स्वीकृत पदों के मुकाबले 23 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी है। विधानसभा 2026 के प्रश्नोत्तर में उजागर हुए ये आंकड़े बताते हैं कि सरकारी दावों के विपरीत जमीनी हकीकत काफी कठिन है।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे जिला स्वास्थ्य विभाग के पास आज तक एक भी चर्म रोग (स्किन) विशेषज्ञ नहीं है।

जेपी अस्पताल में हालात सबसे अधिक चिंताजनक

शहर के प्रमुख जेपी अस्पताल में हालात सबसे अधिक चिंताजनक हैं, यहां विशेषज्ञों के 17 पद रिक्त हैं। अस्पताल के मुखिया यानी “सिविल सर्जन” का पद भी खाली है, जिसका अतिरिक्त प्रभार डॉ. संजय जैन संभाल रहे हैं। डॉ. जैन के पास ईको जांच की जिम्मेदारी भी है, जिससे प्रशासनिक कार्यों के कारण अक्सर जांच कक्ष बंद रहता है। यहां मेडिसिन के चार और ओटी टेक्नीशियन के चार पद खाली पड़े हैं।

कैलाशनाथ काटजू जच्चा-बच्चा अस्पताल में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले आते हैं, लेकिन यहां मेडिसिन विशेषज्ञ के दोनों पद रिक्त हैं। वहीं, बैरासिया सिविल अस्पताल में बीते छह साल से कोई मेडिसिन विशेषज्ञ नहीं है। यहां सर्जरी, एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पद भी खाली हैं, जिससे ग्रामीणों को भोपाल की दौड़ लगानी पड़ती है।

अस्पतालों में रिक्त पदों की स्थिति

जेपी अस्पताल, भोपाल

मेडिसिन डॉक्टर: चार पद खाली

ओटी टेक्नीशियन: चार पद खाली

रेडियोलॉजिस्ट: तीन पद खाली

हड्डी रोग विशेषज्ञ: दो पद खाली

कैलाशनाथ काटजू अस्पताल

मेडिकल ऑफिसर: पांच पद खाली

स्त्री रोग विशेषज्ञ: तीन पद खाली

मेडिसिन विशेषज्ञ: दो पद खाली

सर्जरी विशेषज्ञ: दो पद खाली

सिविल अस्पताल, गोविंदपुरा

अधीक्षक का पद खाली

स्त्री रोग, मेडिसिन, सर्जरी, हड्डी रोग और रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सोहाया

तीन करोड़ रुपये का नया भवन तैयार

मेडिकल ऑफिसर के दोनों पद अब भी खाली।

 

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