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मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए हटाई जाएगी अधिकतम दो बच्चों की शर्त, कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

 

मध्य प्रदेश में 26 जनवरी, 2001 से यह प्रविधान है कि तीसरा बच्चा होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। साथ ही जो पहले से नौकरी में होंगे और निर्धारित अवधि …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 03 Jan 2026 07:54:25 AM (IST)Updated Date: Sat, 03 Jan 2026 08:02:46 AM (IST)

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए हटाई जाएगी अधिकतम दो बच्चों की शर्त, कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इस पर लिया जा सकता है फैसला। – फाइल फोटो

HighLights

  1. मध्य प्रदेश की सकल प्रजनन दर 2.4 है
  2. शहरी क्षेत्र में 1.8 और ग्रामाीण क्षेत्र की दर 2.6 है
  3. परिवीक्षा अवधि के नियम में भी संशोधन की तैयारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त हटाई जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव जल्द ही अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से परामर्श के बाद नियम में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसके साथ ही एक और बड़ा परिवर्तन नियमों में परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि को लेकर किया जा रहा है। परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह माह में ही कर्मचारी को नियमित कर दिया जाएगा। यह मामला भी निर्णय के लिए कैबिनेट में प्रस्तुत होगा।

मध्य प्रदेश में 26 जनवरी, 2001 से यह प्रविधान है कि तीसरा बच्चा होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। साथ ही जो पहले से नौकरी में होंगे और निर्धारित अवधि के बाद तीसरी संतान होने पर सेवा समाप्त करने का नियम है। इसके कारण कई लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। यह प्रविधान तब किया था, जब प्रजनन दर अधिक थी।

 

राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हटा चुके हैं

सितंबर 2025 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन 2023 के अनुसार मध्य प्रदेश की सकल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.4 है, यानी एक दंपती औसतन 2.4 बच्चे पैदा रहा है। हालांकि, शहरी क्षेत्र में यह दर 1.8 और ग्रामाीण क्षेत्र की 2.6 है। भारत की टीएफआर 1.9 है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ इस तरह का प्रविधान नियम संशोधित करके हटा चुके हैं। बता दें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत प्रजनन दर के हवाले से लगातार तीन बच्चों की बात उठा रहे हैं।

स्कूल, उच्च, चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य विभागों के कर्मियों को होगा लाभ

प्रदेश में स्कूल, उच्च, चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों को नए प्रविधान का लाभ होगा। दरअसल, वर्तमान प्रविधान के कारण कई कर्मचारी नौकरी के लिए अपात्र हो गए और उनकी सेवाएं समाप्त हो गईं। हालांकि, जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें नए प्रविधान से कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि निर्णय को पुरानी तिथि से लागू नहीं किया जाएगा।

परिवीक्षा समाप्ति के छह माह के भीतर होंगे नियमित

उधर, सरकार परिवीक्षा अवधि के नियम में भी संशोधन करने जा रही है। नियुक्ति के बाद दो या तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी करने के छह माह के भीतर नियमित करना पड़ेगा। अभी इसमें विलंब होता है, जिसका असर वार्षिक वेतनवृद्धि पर पड़ता है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ लगातार इस बात को उठा रहा है कि परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के लिए समिति की बैठकें नियमित होनी चाहिए। इनके न होने से कर्मचारियों को आर्थिक हानि होती है।

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