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भोपाल में आदमपुर के भूजल में बैक्टीरिया, कचरा खंती से शुद्ध जल हो रहा दूषित

 

आदमपुर की बदहाली की मुख्य जड़ है गांव से सटी कचरा खंती। यहां रोजाना राजधानी का करीब 800 टन कचरा डंप किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि साल 2018 से …और पढ़ें

भोपाल में आदमपुर के भूजल में बैक्टीरिया, कचरा खंती से शुद्ध जल हो रहा दूषित

आदमपुर छावनी में नगर निगम द्वारा जिन पानी की टंकियों को टैंकर के पानी से भरा जाता है, उन्हीं टंकियों का पानी छावनी के शासकीय स्कूल के बच्चे पीने को मजबूर हैं, क्योंकि यहां का भूजल दूषित हो चुका है।

HighLights

  1. गांव के 8 हैंडपंप और 2 कुएं गंदगी और बदबू की मार झेल रहे हैं
  2. 7 हजार की आबादी नगर निगम द्वारा रखी गई 12 टंकियों पर निर्भर
  3. कपड़े धोने और नहाने के लिए दूषित पानी का उपयोग करते हैं लोग

 भोपाल। कभी जिस आदमपुर छावनी के कुओं और हैंडपंपों का पानी अमृत जैसा मीठा होता था, आज वहां की धरती जहर उगल रही है। रायसेन रोड पर स्थित इस गांव में पानी की समस्या अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। नगर निगम की जांच में भूजल (हैंडपंप, कुएं का पानी) के सैंपलों में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि ने ग्रामीणों की उन आशंकाओं पर मुहर लगा दी है, जिनसे वे पिछले आठ सालों से जूझ रहे हैं।

शुक्रवार को नवदुनिया की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर हकीकत देखी, तो ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। लोगों ने बताया कि वे कपड़े धोने और नहाने जैसे दैनिक कार्यों के लिए आज भी दूषित पानी का ही उपयोग करने को मजबूर हैं। सबसे डरावनी स्थिति गांव के सरकारी स्कूल की है, जहां बच्चे सड़क पर रखी टंकियों के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं।

 

कचरे के पहाड़ ने सोख ली गांव की सेहत

आदमपुर की बदहाली की मुख्य जड़ है गांव से सटी कचरा खंती। यहां रोजाना राजधानी का करीब 800 टन कचरा डंप किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि साल 2018 से पहले यहां के जल स्रोत पूरी तरह शुद्ध थे, लेकिन कचरा खंती के शिफ्ट होने के बाद से भूजल प्रदूषित होना शुरू हुआ। कचरे से रिसने वाला गंदा तरल (लीचेट) धीरे-धीरे जमीन के भीतर उतरकर कुओं और बोरवेल में मिल गया है, जिससे पानी अब उपयोग के लायक नहीं बचा।

ओवरहेड टैंक बना सफेद हाथी, टैंकर बने लाइफलाइन

विडंबना देखिए कि गांव में पांच साल पहले जल-नल योजना के तहत 50 हजार लीटर की क्षमता वाला ओवरहेड टैंक बनाया गया था, लेकिन वह आज शो-पीस बनकर रह गया है। गांव के 8 हैंडपंप और 2 कुएं गंदगी और बदबू की मार झेल रहे हैं। फिलहाल गांव की 7 हजार की आबादी नगर निगम द्वारा रखी गई 12 टंकियों पर निर्भर है। रत्नागिरी क्षेत्र से आने वाले टैंकर ही अब इन ग्रामीणों की प्यास बुझा रहे हैं।

दूषित पानी से ऐसे बचें

अगर आपके क्षेत्र के पानी की जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया जाता है तो उस पानी का उपयोग न करें। बहुत जरूरत हो तो पानी को 100 डिग्री सेल्सियस पर उबाकर या फिल्टर करके की उपयोग करें। नगर निगम से अपने बोरवेल, कुएं और हैंडपंप के पानी की जांच कराएं।

कुआं भी हो गया जहरीला

1995 में खोदा गया हमारा साफ कुआं अब कचरा खंती के कारण जहर उगल रहा है। पानी से उठती बदबू ने इसका उपयोग बंद करा दिया। – हिम्मत सिंह, स्थानीय रहवासी

दूर-दराज से साफ पानी ला रहे लोग

11 गांव के बोरवेल से अब लाल और गंदा पानी निकलता है। मजबूरी में लोग दूर-दराज से पीने का साफ पानी ढोने को विवश हैं। -गायत्री बाई, स्थानीय रहवासी

पुराने टैंकर बेकार हैं

खंती ने हमारे भूजल को जहरीला बना दिया है। पुराने टैंक बेकार हैं, अब गांव में नए वाटर सप्लाई नेटवर्क की सख्त जरूरत है। – आकाश इंदौरिया, सरपंच प्रतिनिधि, आदमपुर छावनी

टैंकरों से की जा रही पानी की सप्लाई

आदमपुर छावनी में नगर निगम के टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है । सुबह-शाम पानी के टैंकर पहुंचाए जा रहे हैं। खंती के कचरे को जल्द से जल्द निष्पादित किया जाएगा। – संस्कृति जैन, निगमायुक्त

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