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ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने की न करें गलती, मुआवजे से धो बैठेंगे हाथ

 

ट्रेन देरी से चलने पर जल्दबाजी में टिकट कैंसिल करना यात्रियों को नुकसान पहुंचा सकता है। भोपाल के एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि तय प्रक् …और पढ़ें

ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने की न करें गलती, मुआवजे से धो बैठेंगे हाथ

ट्रेन लेट होने पर कैंसिल करने का फैसला यात्रियों को देगा सिर्फ नुकसान। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सीधे टिकट कैंसिल करने पर पूरा रिफंड नहीं मिलेगा।
  2. तय प्रक्रिया न अपनाने पर दावा कमजोर माना जाएगा।
  3. कनेक्टिंग ट्रेन छूटने के सबूत रखना जरूरी होता है।

डिजिटल डेस्क। ट्रेन लेट होने पर घबराकर लिया गया फैसला यात्रियों को भारी नुकसान में डाल सकता है। भोपाल के एक रेल यात्री के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने साफ कर दिया है कि यदि ट्रेन देरी से चलने की स्थिति में यात्री रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करता और सीधे टिकट कैंसिल कर देता है, तो न तो उसे पूरा रिफंड मिलेगा और न ही मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा मान्य होगा। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए सबक है, जो ट्रेन लेट होते ही नियम समझे बिना जल्दबाजी में टिकट रद्द कर देते हैं।

क्या है पूरा मामला

भोपाल निवासी यात्री ने सितंबर 2023 में भोपाल से नई दिल्ली जाने के लिए आंध्रप्रदेश एक्सप्रेस में AC-2 श्रेणी का टिकट बुक किया था। ट्रेन निर्धारित समय से करीब तीन घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंची। इसके कारण यात्री की आगे की कनेक्टिंग यात्रा प्रभावित हुई और नई दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस छूट गई। इसके बाद यात्री ने दोनों टिकट कैंसिल करा दिए। जब उसे पूरा रिफंड नहीं मिला तो उसने रेलवे पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

 

आयोग का फैसला

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सुनवाई के बाद माना कि ट्रेन देरी से पहुंची थी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यात्री ने नियमों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया। आयोग ने कहा कि केवल ट्रेन के लेट होने से रेलवे को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब यात्री स्वयं तय प्रक्रिया से हटकर कदम उठाए। इसी आधार पर शिकायत खारिज कर दी गई। यह फैसला बैंच एक के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य प्रतिभा पांडे ने सुनाया।

ट्रेन लेट होने पर क्या करना चाहिए

आयोग के अनुसार, यदि ट्रेन तीन घंटे या उससे अधिक देरी से चलती है तो यात्री को टिकट कैंसिल करने के बजाय TDR (टिकट डिपॉजिट रिसीट) दाखिल करनी चाहिए। सीधे टिकट कैंसिल करने पर रेलवे द्वारा की गई कटौती नियमों के अनुरूप मानी जाएगी और इसे सेवा में कमी नहीं कहा जा सकता।

यात्रियों के लिए जरूरी सबक

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कनेक्टिंग ट्रेन छूटने की स्थिति में यात्री को सबूत प्रस्तुत करना जरूरी होता है। टिकट, समय-सारिणी और यात्रा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। बिना TDR फाइल किए उपभोक्ता फोरम में मुआवजे की उम्मीद करना कमजोर दावा माना जाएगा।

जानिए अपने अधिकार

यदि ट्रेन तीन घंटे या उससे ज्यादा देरी से चलती है तो यात्री रिफंड के हकदार हो सकते हैं, लेकिन तय प्रक्रिया के तहत। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदेभारत जैसी ट्रेनों के तीन घंटे से अधिक लेट होने पर यात्रियों को फ्री भोजन देने का भी प्रावधान है। वहीं, ट्रेन रद्द होने या मिस होने की स्थिति में भी निर्धारित समय के भीतर TDR दाखिल करने पर रिफंड मिल सकता है।

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