मध्य प्रदेश में 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण शुरू होगा। जल संरक्षण, तालाब-कुओं के पुनर्जीवन और जनभागीदारी से भूजल स्तर सुधारने का ल …और पढ़ें

प्रदेश में लगातार तीसरे वर्ष चलाया जाएगा जल गंगा संवर्धन अभियान। (फाइल फोटो)
HighLights
- 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण शुरू।
- उज्जैन शिप्रा तट से मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे अभियान शुभारंभ।
- प्रदेश में वर्तमान में 64 हजार से अधिक जल संरचनाएं निर्माणाधीन।
भोपाल। प्रदेश में लगातार तीसरे वर्ष जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जाएगा। 19 मार्च नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अभियान का शुभारंभ करेंगे। वर्तमान में प्रदेश में 64 हजार 395 जल संरचनाएं बनाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्य प्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। अभियान 30 जून तक चलेगा।
उन्होंने अभियान को लेकर बताया कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां केवल जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परंपरा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि अभियान में गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है। सब इसमें भागीदारी करें। गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए।
वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करें। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पहले चरण में बनीं थीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं
- उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में जल गंगा संवर्धन अभियान के पहले चरण में 2.79 लाख से अधिक तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत, नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं के काम किए गए।
- अभियान के दूसरे चरण 2025 में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया गया। वर्तमान में 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें खेत तालाब, चेक डैम, स्टाप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं।




