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गुना में दिव्यांगों को बांटी गई ‘कबाड़’ ट्राइसिकल, सिंधिया की फटकार के बाद जागा प्रशासन, दिव्यांग को घर जाकर दी नई ट्राइसिकल

 

गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों दिव्यांग रामरतन ओझा को घटिया ट्राइसिकल वितरित कराने के मामले में जिला प्रशासन ने अपनी जिम्मेदा …और पढ़ें

गुना में दिव्यांगों को बांटी गई 'कबाड़' ट्राइसिकल, सिंधिया की फटकार के बाद जागा प्रशासन, दिव्यांग को घर जाकर दी नई ट्राइसिकल

गुना में केंद्रीय मंत्री सिंधिया के हाथों दिव्यांग को वितरित ट्राइसिकल का रिम टेढ़ा होने का मामला

HighLights

  1. गुना में केंद्रीय मंत्री सिंधिया के हाथों दिव्यांग को वितरित ट्राइसिकल का रिम टेढ़ा होने का मामला
  2. जिला प्रशासन ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के पाले में डाली गेंद
  3. मंत्री बोले- कलेक्टर की देख-रेख में बांटी जाती हैं दिव्यांगों को ट्राइसिकल, पीएस से करांएगे जांच

भोपाल। गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों दिव्यांग रामरतन ओझा को घटिया ट्राइसिकल वितरित कराने के मामले में जिला प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। गुणवत्ता में कमी की गेंद सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग व भारत सरकार के उपक्रम भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) के पाले में डाल दी, वहीं प्रदेश के सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह दिव्यांग के साथ हुए धोखे से नाराज हैं।

उन्होंने कहा कि कलेक्टर की देख-रेख में पूरा काम होता है। जिला प्रशासन के अधिकारी ही गुणवत्ता की जांच करते हैं। मामले की विभाग की प्रमुख सचिव से जांच कराई जाएगी। दरअसल केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने सोमवार को सर्किट हाउस में रामरतन सहित 12 अन्य दिव्यांगों को ट्राइसिकल वितरित कीं। पुरानी छावनी निवासी रामरतन ओझा को जो ट्राइसिकल मिली, उसका एक रिम करीब 500 मीटर चलने के बाद ही टेढ़ा हो गया। मामला इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ तो केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने अधिकारियों को फटकार लगाई और पीड़ित हितग्राही के घर नई ट्राइसिकल पहुंचवाई।

 

कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक अब्दुल गफ्फार को मामले की जांच कराने को कहा। साथ ही उपकरण उपलब्ध कराने वाली संस्था एलिम्को को पत्र लिखवाया। वहीं विभागीय मंत्री का कहना है कि विभाग का सीधे कोई लेना-देना नहीं रहता। एलिम्को भारत सरकार का उद्यम है, जो उपकरण की आपूर्ति करता है। जिले में कलेक्टर की देख-रेख में सारी चीजें होती हैं। बता दें कि गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल पहले शाजापुर के कलेक्टर थे। वहां ट्रक आपरेटरों की हड़ताल के वक्त बैठक में एक ड्राइवर की औकात पूछने के मामले में उन्हें मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने हटा दिया था।

संस्था के एक्सपर्ट ही करेंगे जांच

गुना में सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक अब्दुल गफ्फार का कहना है कि जिले की भूमिका सिर्फ हितग्राही सामने लाने की होती है। एलिम्को ही दिव्यांगों का चयन करती है, जो कृत्रिम उपकरण व ट्राइसिकल आदि की खरीदी और वितरण कराती है। जिस ट्राइसिकल का रिम टेड़ा हुआ है, उसे अलग रखवा दिया गया है। एलिम्को के एक्सपर्ट जांच करके रिपोर्ट देंगे। वहीं, वस्तुस्थिति जानने के लिए इस संबंध में विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली पोंक्षे वायंगणकर से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने संदेश दिया कि वे बीमार हैं।

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