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MP में निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण के दावे कागजी, पोर्टल पर डेटा देने में 24 हजार स्कूल पीछे

 

भोपाल। प्रदेश में निजी स्कूलों में फीस की मनमानी को नियंत्रित करने के लिए लागू निजी स्कूल शुल्क विनियमन कानून प्रभावी साबित नहीं हो पा रहा है। दो साल पहले इसमें संशोधन कर इसे सख्ती से लागू करने का दावा किया गया था, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

पोर्टल पर अपलोड नहीं की जानकारी

सत्र शुरू होने के बाद भी प्रदेश के अधिकांश निजी स्कूलों ने अपनी फीस संरचना और किताबों की सूची एजुकेशन पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। जबकि नियमानुसार सत्र शुरू होने से 90 दिन पहले यह जानकारी देना अनिवार्य है। सत्र शुरू हुए 26 दिन बीत चुके हैं, लेकिन स्कूलों की ओर से जानकारी नहीं दी गई है।

 

स्कूल शिक्षा विभाग ने पहले 31 दिसंबर तक पोर्टल पर फीस की जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद समयसीमा 31 जनवरी, 15 फरवरी, 31 मार्च और अब 30 अप्रैल तक बढ़ाई जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक केवल 323 निजी स्कूलों ने ही जानकारी अपलोड की है।

प्रदेश में कुल 34,965 निजी स्कूलों में से 10,423 स्कूलों की फीस संबंधी जानकारी ही पोर्टल पर उपलब्ध है, जबकि 24,542 स्कूलों ने अब तक कोई जानकारी नहीं दी है।

राजधानी भोपाल में भी स्थिति चिंताजनक

राजधानी भोपाल में 98 निजी स्कूलों में से केवल 72 ने ही फीस की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की है। कई स्कूलों की वेबसाइट पर अब भी पिछले सत्र की जानकारी ही दिखाई दे रही है। इसके चलते अभिभावकों को अधिक फीस देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

अधिकारियों की अनदेखी से बढ़ रही मनमानी

फीस अधिनियम और बैग पॉलिसी का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभाग कई बार निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारियों की अनदेखी के कारण निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं लग पा रही है। मप्र पालक महासंघ द्वारा भी कई बार कलेक्टर को ज्ञापन देकर सख्ती से कार्रवाई की मांग की जा चुकी है।

जिम्मेदारों का क्या कहना

“अभी पिछले सत्र के 34 हजार में से करीब 10 हजार स्कूलों ने जानकारी दी है। फिर से 30 अप्रैल तक की तारीख बढ़ाई गई है। इसके बाद जानकारी नहीं देने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाया जाएगा।”

– धर्मेंद्र शर्मा, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

“स्कूलों को पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने के लिए बच्चों की संख्या के आधार पर एक हजार से पांच हजार रुपये तक फीस देना अनिवार्य है। समय पर जानकारी नहीं देने वाले स्कूलों पर पांच गुना जुर्माने का प्रावधान है।”

– प्रबोध पंड्या, महासचिव, मप्र पालक महासंघ

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