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भोपाल जंक्शन के बाहर आधी रह गई सड़क! ऑटो, अतिक्रमण, गड्ढों और ट्रैफिक जाम से रोजाना 40 हजार यात्री परेशान

 

भोपाल जंक्शन के प्लेटफॉर्म-1 की सड़क अतिक्रमण और गड्ढों के कारण बेहद संकरी और खतरनाक हो गई है। …और पढ़ें

भोपाल जंक्शन के बाहर आधी रह गई सड़क! ऑटो, अतिक्रमण, गड्ढों और ट्रैफिक जाम से रोजाना 40 हजार यात्री परेशान

भोपाल स्टेशन पर अव्यवस्था चरम पर रोड जाम बना आम।

HighLights

  1. ऑटो सड़क पर खड़े, ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ी
  2. बारिश में पानी भरने से दुर्घटना का खतरा बढ़ा
  3. 15 दिन में ऑटो पार्किंग और सड़क सुधार का प्लान

भोपाल: भोपाल जंक्शन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-एक से रोजाना हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है, लेकिन स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-एक की साइड की सड़क खुद परेशानी का बड़ा कारण बन गई है। करीब 20 फीट चौड़ी इस सड़क को अतिक्रमण और अव्यवस्था के चलते लोगों ने लगभग 10 फीट तक सीमित कर दिया है।

दूसरी ओर सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं, जिससे पैदल चलना और वाहन निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है। खासकर सुबह-शाम के पीक ऑवर्स में यहां जाम की स्थिति आम बात हो गई है।

यात्रियों की बढ़ती परेशानी

ट्रेन पकड़ने या उतरने वाले यात्रियों को यहां अक्सर देरी झेलनी पड़ती है। गड्ढों और अव्यवस्थित ट्रैफिक से बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को चलने में दिक्कत होती है। बारिश में पानी भरने से फिसलने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है, वहीं भारी सामान के साथ आवाजाही और मुश्किल हो जाती है।

 

हर समय बना रहता है खतरा

सड़क की खराब हालत और भीड़भाड़ के कारण अचानक ब्रेक लगाने या मुड़ने से हादसों की आशंका बनी रहती है। जाम लगने पर एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी वाहन भी फंस सकते हैं, जिससे समय पर मदद मिलना मुश्किल हो जाता है। रात में पर्याप्त रोशनी न होने से यह जोखिम और बढ़ जाता है।

निगरानी की कमी बनी वजह

नियमों का पालन न होने के पीछे सबसे बड़ा कारण पर्याप्त निगरानी और सख्त कार्रवाई की कमी है। मौके पर अक्सर ट्रैफिक पुलिस या रेलवे स्टाफ की मौजूदगी नहीं होती, जिससे चालक नियमों की अनदेखी करते हैं। नियमित चेकिंग और जुर्माने की सख्ती न होने से समस्या लगातार बनी हुई है।

40 हजार यात्रियों पर भारी अव्यवस्था

रोजाना लगभग 40 हजार यात्री इस मार्ग से आते-जाते हैं। वहीं करीब 40 आटो प्रतिदिन सड़क पर ही खड़े रहते हैं, जिससे पूरी सड़क घिर जाती है। हैरानी की बात यह है कि इस अव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए मौके पर कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती।

ये हो सकते हैं समाधान

स्थिति सुधारने के लिए ड्राप-आफ और पिक-अप के लिए अलग लेन बनाई जाए। ऑटो-टैक्सी के तय स्टैंड सुनिश्चित कर सख्ती से पालन कराया जाए। सड़कों की नियमित मरम्मत, स्पष्ट साइनज और बैरिकेडिंग जरूरी है। साथ ही पीक ऑवर्स में विशेष ट्रैफिक मैनेजमेंट लागू कर जाम और अव्यवस्था नियंत्रित की जाए।

रेलवे स्टेशन पर केवल 10 मिनट की पिक-अप और ड्रॉप सुविधा और अंदर ऑटो पार्किंग की व्यवस्था न होने से चालक सड़क पर ही वाहन खड़े करते हैं, जिससे ट्रैफिक समस्या बढ़ रही है। इसे सुधारने के लिए रेलवे और नगर निगम ने मिलकर ऑटो पार्किंग के लिए अलग स्थान तय करने का निर्णय लिया है, जिसे 15 दिनों में चिह्नित किया जाएगा। साथ ही सड़क मरम्मत पर भी काम होगा।

– जितेंद्र पवार, पुलिस उपायुक्त ट्रैफिक

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