Bhopal Breaking news Latest News MP Polictics

फोर-व्हीलर के लिए 100 में से 60 अंक लाना जरूरी, कमर्शियल के लिए पूरे 100 नंबर अनिवार्य

 

भोपाल। भोपाल सहित मध्य प्रदेश में ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल शुरू होने के बाद फोर-व्हीलर लाइसेंस बनवाने के नियम बेहद सख्त होने जा रहे हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की नई व्यवस्था के तहत अब ड्राइविंग टेस्ट कुल 100 अंकों का होगा।

इसमें सामान्य फोर-व्हीलर (निजी वाहन) का लाइसेंस पास करने के लिए आवेदकों को कम से कम 60 नंबर लाना अनिवार्य होगा। तय अंक से एक नंबर भी कम आने पर आवेदक को फेल घोषित कर दिया जाएगा और उसे दोबारा टेस्ट के लिए नया स्लॉट बुक करना होगा।

वही, कमर्शियल (व्यावसायिक) ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को और भी कड़ा किया गया है। इसके लिए आवेदकों को 100 में से पूरे 100 अंक लाना अनिवार्य होगा, यानी छोटी सी गलती पर भी कमर्शियल लाइसेंस का आवेदन निरस्त हो जाएगा।

सेंसर और कैमरों की डिजिटल निगरानी, गलती करते ही कटेंगे अंक

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य केवल कुशल चालकों को ही सड़क पर वाहन उतारने की अनुमति देना है। पूरा ड्राइविंग टेस्ट पूरी तरह से सेंसर और अत्याधुनिक कैमरों की निगरानी में लिया जाएगा। वाहन संचालन के दौरान आवेदक द्वारा की गई हर छोटी-बड़ी गलती सिस्टम में स्वतः रिकॉर्ड हो जाएगी।

टेस्ट ट्रैक पर लाइन तोड़ने, सिग्नल का पालन नहीं करने, वाहन पर से नियंत्रण खोने या निर्धारित ट्रैक पर त्रुटि करने पर कंप्यूटर सॉफ्टवेयर द्वारा तुरंत अंक काट लिए जाएंगे।

फोर-व्हीलर टेस्ट: इस तरह बंटे हैं 100 अंक

सेंसर ट्रैक पर होने वाले टेस्ट के विभिन्न चरणों के लिए अंकों का निर्धारण इस प्रकार किया गया है:

– पैरेलल पार्किंग – 25 अंक

– जंक्शन पर सही संचालन – 25 अंक

– ‘8’ ट्रैक पर वाहन चलाना- 20 अंक

– पैदल यात्री क्रॉसिंग- 15 अंक

इसके अतिरिक्त सिग्नल का सही पालन करने और वाहन नियंत्रण की दक्षता पर भी अलग से अंक दिए जाएंगे।

नई व्यवस्था के फायदे और आरटीओ का रुख

परिवहन विभाग का मानना है कि इस डिजिटल टेस्ट से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया में शत-प्रतिशत पारदर्शिता और विश्वसनीयता आएगी। भ्रष्टाचार या पैरवी के दम पर लाइसेंस बनवाने के खेल पर पूरी तरह रोक लगेगी। जब केवल पूरी तरह प्रशिक्षित चालकों को ही लाइसेंस मिलेगा, तो सड़क हादसों के ग्राफ में भी बड़ी गिरावट दर्ज होगी।

भोपाल में वर्तमान में रोजाना औसतन 100 परमानेंट (स्थायी) लाइसेंस जारी किए जाते हैं। विभाग से जैसे ही अंतिम विस्तृत गाइडलाइन प्राप्त होगी, भोपाल में इस नई ऑटोमैटिक टेस्ट व्यवस्था को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।- जितेंद्र शर्मा, आरटीओ, भोपाल

 

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply