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भोपाल गोवंश वध मामला… कोर्ट ने माना बचाव पक्ष का तर्क, दिए CCTV फुटेज, फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट रही बेअसर

 

राजधानी के चर्चित कथित गोवंश वध व गोमांस तस्करी मामले में गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने बचाव पक्ष की उस मांग को स्वीकार कर लिया, जिसमें जांच एजे …और पढ़ें

भोपाल। राजधानी के चर्चित कथित गोवंश वध व गोमांस तस्करी मामले में गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने बचाव पक्ष की उस मांग को स्वीकार कर लिया, जिसमें जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

न्यायिक मजिस्ट्रेट जयदीप मौर्य की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा की ओर से अधिवक्ता जगदीश गुप्ता ने तर्क दिया कि आरोप तय करने से पहले यह साबित किया जाना आवश्यक है कि गायों को स्लाटर हाउस के अंदर लाया गया, वहीं उनका वध किया गया और फिर मांस की पैकिंग कर सप्लाई के लिए भेजा गया। अधिवक्ता गुप्ता ने बताया कि अदालत ने चालान के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेते हुए बचाव पक्ष को सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी है।

 

फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट: मांस का नमूना सड़ने से वैज्ञानिक जांच संभव नहीं

मामले की अगली सुनवाई अब 17 जुलाई 2026 को होगी। इसी आधार पर आरोप तय करने से पहले साक्ष्यों की वैधानिकता पर बहस छिड़ गई है। मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू हैदराबाद की फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट भी है। एसआइटी ने अदालत में ई-मेल प्रस्तुत कर बताया कि जांच के लिए भेजा गया मांस का नमूना सड़ चुका था, इसलिए उसकी वैज्ञानिक जांच संभव नहीं हो सकी।

मामले का घटनाक्रम: अब तक क्या हुआ

  • 17 दिसंबर 2025: मांस से भरा ट्रक पकड़ा गया।
  • 23 दिसंबर 2025: मथुरा लैब की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पुलिस को मिली।
  • 8 जनवरी 2026: असलम चमड़ा और ट्रक चालक शोएब के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई तथा स्लाटर हाउस सील किया गया।
  • 6 मार्च 2026: दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया।
  • 18 जून 2026: अदालत ने बचाव पक्ष की मांग पर सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की अनुमति दी।
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