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पर्यटन विभाग शुरू कर रहा ‘एस्ट्रो-टूरिज्म’; 6 गांवों में ₹6 करोड़ से लगेंगे टेलीस्कोप

 

भोपाल। मध्य प्रदेश का पर्यटन विभाग अब पर्यटकों को दूरदराज स्थित गांवों से अंतरिक्ष में आकाशगंगा और दूसरे ग्रहों-उपग्रहों के दर्शन कराएगा।

इसे एस्ट्रो-टूरिज्म (अंतरिक्ष पर्यटन) नाम दिया गया है। इसके तहत प्रदूषण से दूर शांत वन क्षेत्रों से लगे ग्रामीण इलाकों में पर्यटकों के लिए स्टार गेजिंग (तारामंडल और खगोलीय पिंडों को देखने की सुविधा) शुरू की जाएगी।

6 गांवों को किया शामिल

योजना के प्रथम चरण में छह गांवों रिचकुड़ी (दमोह जिला), ज्ञानपुरा (धार), धूसवानी (छिंदवाड़ा), बंचा (बैतूल), धाबा (नर्मदापुरम) और रांचा (उमरिया) का चयन कर लिया गया है। इन गांवों में होम स्टे जैसी ग्रामीण पर्यटन सुविधाएं पहले से विकसित हैं। ये गांव पहाड़, वन, झरने, धार्मिक-ऐतिहासिक पर्यटन केंद्रों और बाघ अभयारण्यों के नजदीक हैं। यानी यह पर्यटकों के लिए पूरे पैकेज के रूप में होगा।

इस साल अक्टूबर-नवंबर से होगी शुरूआत

अधिकारियों के अनुसार इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर तक कुछ गांवों में अंतरिक्ष दर्शन की शुरुआत हो जाएगी। अभी तक लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में स्टार गेजिंग की सुविधा है। इस परियोजना में प्रशिक्षण, उपकरण, प्रचार-प्रसार और संचालन की व्यवस्था में प्रत्येक गांव पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च होंगे। होम स्टे के पास उचित स्थान चिह्नित कर प्लेटफार्म बनाया जाएगा। वहां टेलीस्कोप जैसे उपकरण लगाए जाएंगे। वहीं पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था होगी।

जिन गांवों को चुना गया, वे अन्य कारणों से भी हैं खास

1. रिचकुड़ीः 10-11वीं शताब्दी की कुबेर प्रतिमा इसी गांव से मिली थी। होम स्टे में बुंदेलखंडी संस्कृति का अनुभव मिलता है। रानी दुर्गावती बाघ अभयारण्य, सिंगोरगढ़ का किला, निदान कुंड कुछ ही दूरी पर।

2. ज्ञानपुराः हरे-भरे पेड़ों से घिरा शांत वातावरण। भोजशाला से तीन किमी, मांडू से 20 किमी दूर है।

3. धुसवानीः पर्यटक स्थल तामिया से चार किमी दूर। होम स्टे, गोंड-भारिया आदिवासी संस्कृति और शिल्प का प्रमुख केंद्र।

4. बंचाः घने वनों, पहाड़ियों से घिरा गांव घुघरा और मछना नदियों के संगम पर बसा है। होम स्टे है। बालाजीपुरम मंदिर और ताप्ती नदी का उद्गम स्थल नजदीक है।

5. धाबाः सतपुड़ा बाघ अभयारण्य के प्रवेश द्वार मढ़ई के पास। नर्मदा और तवा का संगम। तवा जलाशय भी पास है। होम स्टे भी।

6. रांचा: बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य के प्रवेश द्वार ताला के पास। पक्षी प्रेमियों के लिए पहले से लोकप्रिय स्थान। जंगल सफारी, बर्ड वाच और बदरी का किला देखने का अवसर।

अभी तक ग्रामीण पर्यटन के तहत होम स्टे जाने वाले पर्यटक बैलगाड़ी की सवारी, गांव और खेतों का भ्रमण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते रहे हैं। अब वे रात में अंतरिक्ष के नजारे देखने का रोमांच भी प्राप्त कर सकेंगे। हर मौसम में अंतरिक्ष का नजारा बदलता रहता है, इसलिए पर्यटकों को हर बार कुछ नया देखने को मिलेगा। – डॉ. इलैयाराजा टी., प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पर्यटन मंडल

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