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क्या एमपी में 9 अगस्त को बंद रहेंगे स्कूल, कॉलेज और सरकारी ऑफिस? विश्व आदिवासी दिवस पर कांग्रेस की बड़ी मांग

 

Public Holiday 09 August: मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग की है।

 

Public Holiday: क्या एमपी में 9 अगस्त को बंद रहेंगे स्कूल, कॉलेज और सरकारी ऑफिस? विश्व आदिवासी दिवस पर कांग्रेस की बड़ी मांग

Public Holiday: 9 अगस्त पर सार्वजनिक अवकाश की कांग्रेस की मांग (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपा गया ज्ञापन
  2. आदिवासी क्षेत्रों में निजीकरण रोकने की मांग
  3. रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने 9 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस (World Tribal Day 09 August 2026) पर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday Demand) घोषित करने की मांग उठाई है। शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस के आदिवासी विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।

राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह

उमंग सिंघार ने मीडिया से चर्चा में बताया कि कमल नाथ सरकार के कार्यकाल में विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 89 विकासखंडों में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अलग से बजट भी उपलब्ध कराया गया था। कांग्रेस ने मांग की है कि इस वर्ष भी 9 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए और राज्य स्तर पर शैक्षणिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

 

स्कूल-कॉलेजों में हों विशेष आयोजन

ज्ञापन में कहा गया है कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और शासकीय संस्थानों में आदिवासी इतिहास, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही आदिवासी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाए।

निजीकरण रोकने और रिक्त पद भरने की मांग

कांग्रेस ने आदिवासी क्षेत्रों में संचालित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI), आदिवासी छात्रावासों और स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण पर रोक लगाने की भी मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि इन संस्थानों में रिक्त पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएं, पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाए।

इसके साथ ही स्थानीय समुदाय की भागीदारी और निगरानी सुनिश्चित कर आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास की सरकारी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की मांग भी की गई है।

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