नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्य प्रदेश में भवन निर्माण एवं विकास अनुज्ञा प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सु…और पढ़ें

मध्य प्रदेश में भवन निर्माण के नियमों में बड़ा बदलाव (AI तस्वीर)
HighLights
- भवन निर्माण अनुमतियों की प्रक्रिया हुई सरल
- बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति
- अनावश्यक एनओसी की बाध्यता समाप्त
भोपाल। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश में भवन निर्माण एवं विकास अनुज्ञा प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब भवन निर्माण अनुज्ञा प्रकरणों में विभिन्न विभागों से अनावश्यक रूप से मांगे जाने वाले अनेक अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की बाध्यता समाप्त अथवा तर्कसंगत कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत भवन अनुज्ञा की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित होगी।
आवेदन, नक्शे एवं अन्य दस्तावेजों की केवल डिजिटल प्रतियां ही स्वीकार की जाएंगी तथा किसी भी स्थिति में हार्ड कापी प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। भूमि स्वामी द्वारा स्वयं आवेदन करने पर आनलाइन शपथ-पत्र लिया जाएगा, जबकि अधिकृत कंसल्टेंट के माध्यम से आवेदन किए जाने पर भूमि स्वामी द्वारा हस्ताक्षरित शपथ-पत्र अपलोड करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया (एएआइ), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) तथा विरासत क्षेत्रों से संबंधित अनापत्तियों की आवश्यकता अब केवल उन्हीं मामलों में होगी, जहां ऑनलाइन भवन अनुज्ञा प्रणाली में जीआईएस आधारित सत्यापन के माध्यम से संबंधित भूखंड प्रभावित अथवा प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थित पाया जाएगा।
अन्य सभी मामलों में इन अनापत्तियों की आवश्यकता नहीं होगी। सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, विद्युत तथा नजूल विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की अनापत्तियों की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। इससे भवन अनुज्ञा प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और नागरिक हितैषी बनेगी। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से संबंधित मामलों में अब आवेदकों को स्वयं एनओसी प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। आवश्यकता होने पर सक्षम प्राधिकारी आवेदन प्राप्त होने के सात दिवस के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा तथा विभाग को 21 दिवस के भीतर अपनी अनापत्ति अथवा आपत्ति प्रस्तुत करनी होगी।
निर्धारित अवधि में उत्तर प्राप्त नहीं होने की स्थिति में प्रकरण पर आगे की कार्यवाही की जा सकेगी। निर्देशों में पर्यावरणीय स्वीकृति संबंधी प्रविधानों को भी तर्कसंगत बनाया गया है। निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक के भवनों एवं परियोजनाओं में ही पर्यावरणीय अनापत्ति आवश्यक होगी। इसी प्रकार वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में आवश्यक होगी, जहां वास्तविक रूप से वृक्षों की कटाई प्रस्तावित हो। अग्निशमन अनापत्ति के संबंध में भी राष्ट्रीय भवन संहिता के प्रावधानों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।




