Bhopal Breaking news Latest News MP Polictics

ABVP ने भी उठाई मेडिकल इंटर्न्स की आर्थिक समस्याएं, MBBS-BDS इंटर्न्स का स्टाइपेंड 30,000 करने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

 

परिषद ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन भेजकर महंगाई के अनुरूप वार्षिक वृद्धि का नियम लागू करने की भी मांग रखी।

ABVP ने भी उठाई मेडिकल इंटर्न्स की आर्थिक समस्याएं, MBBS-BDS इंटर्न्स का स्टाइपेंड 30,000 करने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

अभाविप ने मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग उठाई

HighLights

  1. स्टाइपेंड 30 हजार करने की मांग
  2. मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
  3. महंगाई से बढ़ीं इंटर्न्स की मुश्किलें

भोपाल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) महाकोशल प्रांत ने मध्य प्रदेश के शासकीय और निजी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में अध्ययनरत एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न्स डाक्टरों की आर्थिक स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन भेजा है। परिषद ने मांग की है कि प्रदेश के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में इंटर्न्स को मिलने वाला मासिक स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। साथ ही महंगाई भत्ते के अनुरूप हर वर्ष स्वतः वृद्धि का स्थायी प्रावधान भी लागू किया जाए।

इंटर्न्स पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव

अभाविप के महाकोशल-मध्य भारत प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने बताया कि एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न्स चिकित्सा शिक्षा के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वे वार्ड, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और ओपीडी में वरिष्ठ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में नियमित सेवाएं देते हैं। कई बार उन्हें रात्रिकालीन ड्यूटी, आपातकालीन परिस्थितियों और लगातार 24 घंटे तक कार्य करना पड़ता है।

 

उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के बावजूद वर्तमान स्टाइपेंड बढ़ती महंगाई, हॉस्टल या किराये के मकान, भोजन, परिवहन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे खर्चों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। इसके कारण कई इंटर्न्स को आर्थिक रूप से परिवार पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उन पर मानसिक और वित्तीय दबाव बढ़ता है।

समान प्रशिक्षण, फिर भी स्टाइपेंड में अंतर

विद्यार्थी परिषद के चिकित्सा विद्यार्थी आयाम (मेडिविजन) के प्रांत संयोजक आयुष पाराशर ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने पूरे देश में कॉम्पिटेंसी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन के तहत एक समान पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और मूल्यांकन व्यवस्था लागू की है। ऐसे में जब चिकित्सा विद्यार्थियों की शिक्षा और कार्यदायित्व पूरे देश में समान हैं, तो विभिन्न राज्यों में स्टाइपेंड की राशि में बड़ा अंतर उचित नहीं माना जा सकता।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply