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भोपाल के नांदनी गांव में मुक्तिधाम तक सड़क नहीं, कीचड़ के बीच से निकली अंतिम यात्रा

 

भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नांदनी में विकास के दावों की पोल खुल गई। रविवार को एक महिला के शव की अंतिम यात्रा घुटनों तक कीचड़ में कंधों प…और पढ़ें

 

शर्मनाक तस्वीर : भोपाल के नांदनी गांव में मुक्तिधाम तक सड़क नहीं, कीचड़ के बीच से निकली अंतिम यात्रा

कीचड़ के बीच से अर्थी को ले जाते ग्रामीण।

HighLights

  1. रविवार को एक महिला के शव की अंतिम यात्रा घुटनों तक कीचड़ में कंधों पर उठाकर ले जानी पड़ी
  2. सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को हर बारिश में इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ती है
  3. मुक्तिधाम तक जाने का एक और रास्ता है, लेकिन उस पर लोगों ने कब्जा कर लिया है

भोपाल। हुजूर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नांदनी में विकास के दावों की एक बार फिर पोल खुल गई। रविवार को एक महिला के शव की अंतिम यात्रा घुटनों तक कीचड़ से होकर निकालनी पड़ी। मुक्तिधाम तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने शव को कंधों पर उठाकर दलदल जैसे रास्ते से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाया।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद पंचायत और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने समस्या का समाधान नहीं कराया। जानकारी के अनुसार हुजूर विधानसभा की ग्राम पंचायत नांदनी के रहने वाले घनश्याम महेश्वरी की पत्नी कुंता बाई महेश्वरी का निधन हो गया था। जिनके शव की रविवार को दोपहर 12 बजे अंतिम यात्रा निकाली गई, लेकिन मुक्तिधाम तक जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं होने से ग्रामीणों को घुटनों तक कीचड़ में शव को कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ा।

 

अंतिम यात्रा की यह तस्वीर गांव में विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी स्कूल से मुक्तिधाम तक जाने वाला मार्ग वर्षा में पूरी तरह दलदल में तब्दील हो जाता है। हर वर्ष अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को इसी तरह भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार ग्राम पंचायत की सरपंच कृपामणि राजेश वर्मा, पंचायत सचिव तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

सरपंच को बुलाया, देखकर वापस लौटीं

ग्रामीणों का आरोप है कि अंतिम यात्रा के दौरान सरपंच को मौके पर बुलाया गया था। उन्होंने रास्ते की बदहाल स्थिति देखी, लेकिन कुछ देर बाद वहां से चली गईं। इसके बाद भी सड़क और मुक्तिधाम की मूलभूत सुविधाओं के निर्माण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। मुक्तिधाम तक पहुंचने का रास्ता केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि गांव के प्रत्येक परिवार की गरिमा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। इसके बावजूद वर्षों से इस ओर लगातार उपेक्षा बरती जा रही है।

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