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NGT ने कहा- ‘कागजी आंकड़ों से नहीं चलेगा काम’, 3 महीने में मांगी रिपोर्ट

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

विकास बनाम पर्यावरण: भोपाल में 2200 पेड़ कटने के मामले में NGT सख्त, 15 साल तक करनी होगी पौधों के संरक्षण की निगरानी

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए काटे गए पेड़ों और उसके एवज में किए जा रहे पौधारोपण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। डॉ. सुभाष सी. पांडेय की याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सामने आए ‘हरित हिसाब’ ने विकास और पर्यावरण के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्षतिपूरक पौधारोपण केवल कागजों में संख्या पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पौधों के जीवित रहने की लंबी निगरानी जरूरी है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 2200 पेड़ों की कटाई: शहर में विकास परियोजनाओं के तहत कुल 2200 पेड़ों की बलि दी गई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा मेट्रो रेल परियोजनाओं का रहा, जिसके तहत अलग-अलग प्रकरणों में कुल 1509 पेड़ काटे गए। इसके अलावा बीएचईएल के लिए 164 और अन्य शहरी विकास कार्यों के लिए 550 पेड़ों की अनुमति दी गई थी।

  • पौधारोपण का दावा: नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, एयरपोर्ट के तीन स्थानों पर 58,500 समेत आदमपुर छावनी, कलियासोत डैम, बीएचईएल बर्ड सेंक्चुरी और बरखेड़ा पठानी सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुल 96,355 पौधे लगाने का दावा किया गया है।

  • एनजीटी के कड़े निर्देश (15 साल की निगरानी): एनजीटी ने वन विभाग, नगर निगम, उद्यानिकी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों की एक समिति बनाकर पौधों के संरक्षण और जीवित रहने की 15 साल तक निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

  • जीआईएस मैपिंग और वृक्ष गणना: भोपाल नगर निगम क्षेत्र की हाई-रिजोल्यूशन जीआईएस मैपिंग और वृक्ष गणना कराने को कहा गया है, ताकि हर पेड़, उसकी प्रजाति, हरित पट्टी और अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता और अतिक्रमण पर रोक

एनजीटी ने निर्देश दिए हैं कि पौधारोपण के दौरान बरगद, पीपल, नीम, जामुन, देशी आम, कदंब, अर्जुन और साज जैसी स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा सड़क के किनारों, पार्कों और हरित क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाकर फेंसिंग, वनीकरण और जियो-टैगिंग करने को कहा गया है। हरित पट्टियों में कंक्रीटीकरण पर पूरी तरह रोक लगाने तथा अवैध कब्जे से मुक्त जमीन को 12 माह के भीतर हरित आवरण में बदलने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन को अतिक्रमण हटाने संबंधी कार्रवाई की निगरानी कर तीन महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिससे शहर के घटते हरित क्षेत्र को बचाया जा सके।

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