एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में खसरा और मलेरिया का प्रकोप: बालाघाट में 26 बच्चों की मौत, पूरे राज्य में तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के मामले
भोपाल: मध्य प्रदेश के कई जिलों में खसरा, मलेरिया और कुपोषण का मिला-जुला प्रकोप गंभीर रूप लेता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अकेले बालाघाट जिले में इन बीमारियों की चपेट में आने से 26 बच्चों की मौत हो गई है। पिछले साल पूरे प्रदेश में खसरे के कुल 1,800 मरीज मिले थे, जबकि इस साल शुरुआती आठ महीनों में ही यह आंकड़ा 1,450 के पार पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यही रफ्तार रही, तो साल के अंत तक यह संख्या ढाई हजार तक पहुंच सकती है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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बालाघाट में सबसे गंभीर स्थिति: बालाघाट में जुलाई से अगस्त के बीच खसरे के 40 से अधिक संक्रमित मरीज सामने आए हैं, जहां कुपोषण और मलेरिया के साथ मिलकर इस संक्रमण ने बच्चों की जान ली है।
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विभिन्न जिलों के आंकड़े: वर्तमान में खसरे के सबसे अधिक 125 मामले भिंड जिले में दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा शिवपुरी और ग्वालियर में भी लगभग 90-90 रोगी चिह्नित किए गए हैं।
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संक्रमण का चक्रीय पैटर्न: पूर्व राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला के अनुसार, खसरे का संक्रमण हर चौथे वर्ष तेजी से बढ़ता है (जैसे वर्ष 2022 में बढ़ा था और अब 2026 में इसके मामले बढ़े हैं)। हालांकि इसका आम की बौर से कोई संबंध नहीं है, लेकिन दोनों का चक्र अक्सर साथ-साथ देखा जाता है।
संक्रमण की तीव्रता और रोकथाम के उपाय
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तेजी से फैलने वाला संक्रमण: शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, खसरे का संक्रमण बेहद तेजी से फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति से 1 साल से लेकर 20 अन्य स्वस्थ लोगों तक इसके फैलने का खतरा रहता है।
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बचाव और सतर्कता: इस पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका बीमारी की तुरंत पहचान, समय पर उपचार और टीकाकरण है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पहला केस सामने आते ही इसकी सूचना तुरंत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तक पहुंचाई जानी चाहिए।
लोगों को इस संक्रामक बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 16 मार्च को ‘खसरा दिवस’ मनाया जाता है, ताकि समय रहते टीकाकरण और एहतियात बरती जा सके।




