एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
बड़े तालाब का वैज्ञानिक सीमांकन आज से: भदभदा से शुरू होगी ड्रोन मैपिंग, एनजीटी के निर्देशों पर सात विभाग मिलकर तय करेंगे वाटर बॉडी की वास्तविक हद
भोपाल: राजधानी की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब की सीमा को लेकर वर्षों से चल रहे असमंजस और सर्वे के खेल पर अब विराम लगने जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन अब पूरी तरह वैज्ञानिक और हाईटेक तरीके से भोज वेटलैंड, कलियासोत और केरवा जलाशयों की वास्तविक हद तय करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी सर्वे की शुरुआत शनिवार को भदभदा से हो चुकी है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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भदभदा से हुई सर्वे की शुरुआत: शनिवार सुबह से एनजीटी कमेटी, पर्यावरण विशेषज्ञों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में ड्रोन मैपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भदभदा को सर्वे का शुरुआती केंद्र इसलिए बनाया गया है क्योंकि यहीं से पानी कलियासोत की ओर प्रवाहित होता है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की उच्चास्तरीय बैठक में इसकी पूरी रूपरेखा पहले ही तय कर ली गई थी।
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आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल: नो फ्लाई जोन में ड्रोन उड़ाने के लिए केंद्र सरकार से विशेष अनुमति प्राप्त की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में आधुनिक ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, जियो-टैगिंग, पुराने मुनार-पिलर, वीडियोग्राफी और ग्राउंड ट्रुथिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। चूंकि वर्तमान में तालाब फुल टैंक लेवल (FTL) पर है, इसलिए जलस्तर के आधार पर सटीक और वास्तविक आकलन किया जा रहा है।
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2017 के नियमों के तहत होगी जांच: इस बार अवैध निर्माणों और अतिक्रमण की समीक्षा वेटलैंड रूल्स-2022 के स्थान पर वेटलैंड रूल्स-2017 के आधार पर की जाएगी। नई सीमा तय होने के बाद शहरी क्षेत्रों में एफटीएल से 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में 250 मीटर के दायरे में सभी प्रकार के स्थायी व अस्थायी निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे। वेटलैंड, बफर और प्रभाव क्षेत्र में नियम-विरुद्ध पाए गए निर्माणों को 3 महीने के भीतर हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
सात विभागों की संयुक्त कमेटी और अधिकारियों की जवाबदेही
इस पूरी सर्वे प्रक्रिया को पारदर्शी और पुख्ता बनाने के लिए सात विभागों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है:
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शामिल विभाग: पर्यावरण मंत्रालय, CPCB, MANIT, वन विभाग, राज्य वेटलैंड अथॉरिटी, जल संसाधन विभाग और MPPCB। इसमें मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
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जिम्मेदारियों का निर्धारण: सर्वे के दौरान केवल अतिक्रमण ही नहीं बल्कि नियम-विरुद्ध निर्माणों को अनुमति देने वाले या उन्हें रोकने में नाकाम रहे अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है।
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मौसम पर निर्भरता: क्षेत्रीय अधिकारी नीतेश चौरसिया के अनुसार, ड्रोन मैपिंग और सर्वे का पूरा शेड्यूल मौसम के मिजाज, दृश्यता (Visibility) और फुल टैंक लेवल की स्थिति पर निर्भर है। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 15 सितंबर को होगी।




