एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
त्योहारी सीजन से पहले आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत: शकर के दामों में 15 रुपये प्रति किलो तक की भारी गिरावट, स्टॉक लिमिट का असर दिखने लगा
भोपाल: आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले बढ़ती महंगाई से जूझ रहे आम नागरिकों और उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। शकर पर सरकार द्वारा तय की गई स्टॉक लिमिट (स्टॉक सीमा) और प्रशासनिक सख्ती का असर अब खुले बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। पिछले 15 से 20 दिनों के भीतर थोक और खुदरा बाजारों में शकर की कीमतों में लगभग 15 रुपये प्रति किलो तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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थोक और खुदरा भाव में बड़ी राहत: थोक बाजार में जो शकर कुछ दिन पहले तक आसमान छूते हुए 68 रुपये प्रति किलो तक बिक रही थी, वह अब घटकर 53 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। इसी प्रकार, खुदरा (फुटकर) बाजार में भी भाव 70 रुपये से गिरकर करीब 55 रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं।
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जमाखोरी पर लगाम और बढ़ी उपलब्धता: कारोबारियों के अनुसार, स्टॉक सीमा तय होने के बाद थोक व्यापारियों पर अतिरिक्त माल रोककर रखने का दबाव कम हुआ है। इससे बाजार में शकर की आपूर्ति और उपलब्धता दोनों में सुधार हुआ है तथा कृत्रिम जमाखोरी की संभावना पर प्रभावी अंकुश लगा है।
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त्योहारी मांग के बावजूद स्थिर दाम: त्योहारी सीजन के दौरान मीठे की मांग में अचानक तेजी आने के बावजूद वर्तमान में बाजार में आवक पर्याप्त बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतें या तो स्थिर रहेंगी या इसमें और नरमी देखने को मिल सकती है।
स्टॉक सीमा के कड़े नियम और आगामी बदलाव
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वर्तमान भंडारण सीमा: ‘शकर नियंत्रण आदेश-2026’ के प्रावधानों के तहत वर्तमान में थोक कारोबारियों के लिए अधिकतम 4000 क्विंटल और फुटकर कारोबारियों के लिए 100 क्विंटल तक का स्टॉक निर्धारित किया गया है। नियमों के मुताबिक कोई भी डीलर शकर प्राप्त होने की तारीख से 30 दिन से अधिक समय तक स्टॉक अपने पास नहीं रख सकता है।
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और सख्त हो सकते हैं नियम: बाजार सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, आगामी 15 सितंबर तक थोक कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा को घटाकर 2000 क्विंटल किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि अधिकांश थोक व्यापारियों के पास सामान्य दिनों में भी लगभग 1000 क्विंटल तक का ही स्टॉक रहता है, ऐसे में इन कड़े नियमों से कालाबाजारी करने वालों पर पूरी तरह शिकंजा कसने की उम्मीद है।




