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भोपाल में मेट्रो रूट पर टीडीआर लागू करने का विरोध, लोग बोले- पहले नक्शा दिखाओ

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

भोपाल मेट्रो कॉरिडोर टीडीआर जोन प्रस्ताव पर बढ़ा विवाद: संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने टीएंडसीपी की प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल, संशोधन निरस्त करने की मांग

भोपाल: राजधानी भोपाल में मेट्रो रेल कॉरिडोर के दोनों किनारों पर लगभग आधा किलोमीटर के दायरे को ‘ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स’ (TDR) प्राप्ति क्षेत्र घोषित करने की सरकारी कवायद अब विवादों में घिर गई है। नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) विभाग द्वारा इस संबंध में दावे-आपत्तियां आमंत्रित किए जाने के बाद, ‘संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति’ ने इस प्रस्ताव की वैधानिकता, पारदर्शिता और औचित्य पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • नक्शे और खसरा नंबर सार्वजनिक न करने पर आपत्ति: समिति के प्रतिनिधियों (विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी) ने विभाग को औपचारिक आपत्ति सौंपते हुए कहा कि विभागीय कार्यालय या वेबसाइट पर टीडीआर क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, प्रभावित खसरा नंबर और निर्माण मापदंड सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ऐसे में आम नागरिक अपनी आपत्तियां किस आधार पर दर्ज कराएं।

  • मास्टर प्लान-2005 में फेरबदल पर सवाल: समिति ने मुख्य रूप से आपत्ति जताई है कि जब शासन पहले ही ‘भोपाल विकास योजना-2047’ तैयार करने की घोषणा कर चुका है, तो ऐसे में दो दशक पुराने ‘मास्टर प्लान-2005’ में इस तरह का बड़ा संशोधन करने का क्या औचित्य है।

  • संवेदनशील क्षेत्रों पर असर: मेट्रो कॉरिडोर के दायरे में श्यामला हिल्स, अरेरा कॉलोनी (ई-1 से ई-5), बड़े तालाब का कैचमेंट एरिया, संरक्षित वन और राजभवन जैसे अतिसंवेदनशील क्षेत्र आते हैं। समिति का तर्क है कि टीडीआर लागू होने से यहां निर्माण घनत्व (Construction Density) बढ़ेगा, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ेगा।

समिति की प्रमुख मांगें

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने शासन और टीएंडसीपी विभाग से मांग की है कि:

  1. संबंधित क्षेत्र का स्पष्ट सीमांकन और ‘पर्यावरण प्रभाव अध्ययन’ (Environment Impact Assessment) रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए।

  2. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 23 के तहत राजपत्र में अनिवार्य प्रकाशन की प्रक्रिया की जांच की जाए।

  3. मास्टर प्लान-2005 में किए जा रहे इस संशोधन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा इसे केवल आगामी ‘मास्टर प्लान-2047’ में ही व्यापक सार्वजनिक परामर्श के बाद शामिल किया जाए।

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