एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
बुंदेलखंड में गूंजेगी चीतों की दहाड़: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीते बसाने की तैयारियां पूरी, भोपाल के वन विहार जितना बड़ा ‘बोमा’ तैयार
भोपाल: कूनो नेशनल पार्क के बाद अब मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल (सागर-दमोह-नरसिंहपुर) स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR) में भी चीतों को लाने की प्रशासनिक और मैदानी तैयारियां अंतिम चरण में पूरी हो चुकी हैं। चीतों को नए वातावरण में सुरक्षित ढालने और रखने के लिए रिजर्व की मोहली रेंज में भोपाल के वन विहार के आकार का एक विशाल बाड़ा (बोमा) तैयार किया गया है। इस ऐतिहासिक पहल के साथ ही यह देश का इकलौता ऐसा रिजर्व बन जाएगा जहां चार प्रमुख शिकारी एक ही जंगल में एक साथ निवास करेंगे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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विशाल बाड़े (बोमा) का निर्माण: चीतों की सुरक्षा और उनकी मॉनिटरिंग के लिए रिजर्व की मोहली रेंज में 440 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बाड़ा तैयार किया गया है, जो लगभग भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क (445 हेक्टेयर) के बराबर है। इस क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सोलर इलेक्ट्रिक फेंसिंग, सीसीटीवी कैमरे और गश्ती वॉच टावर लगाए गए हैं।
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शिकार के लिए अनुकूल प्राकृतिक माहौल: कुल 2,339 वर्ग किमी में फैले इस सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में अफ्रीकी सवाना जैसे विस्तृत घास के मैदान हैं। यहां चीतल, सांभर, नीलगाय और ब्लैक-बक (कृष्णमृग) पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं, जो चीतों के प्राकृतिक आहार के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं।
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देश का अनूठा संरक्षित क्षेत्र: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के आगमन के साथ ही यह देश का पहला और इकलौता ऐसा संरक्षित क्षेत्र बन जाएगा, जहां चीते, बाघ, तेंदुए और भारतीय भेड़िये जैसे चारों बड़े शिकारी एक साथ एक ही वन क्षेत्र में निवास करेंगे।




