एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामला: सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा पर एफआईआर दर्ज, एमपीपीएससी परीक्षा में आरक्षित वर्ग का लाभ लेने का आरोप
भोपाल: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में शामिल होकर आरक्षित वर्ग का अनुचित लाभ लेने के गंभीर आरोप में पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने मध्य प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा और अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई राघौगढ़ (गुना) निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत और उच्च स्तरीय छानबीन समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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शिकायत और धाराओं पर कार्रवाई: राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत पर पुलिस की सतर्कता शाखा ने जांच के बाद धोखाधड़ी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
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राजनीतिक पृष्ठभूमि: आरोपी रघुवीर सिंह मीणा वर्तमान में गुना से जिला पंचायत सदस्य हैं। उनकी पत्नी ममता मीणा वर्ष 2013 से 2018 तक चाचौड़ा (गुना) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक भी रह चुकी हैं।
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सेवा और प्रमाण पत्र का मामला: रघुवीर सिंह मीणा वर्ष 1986 में डीएसपी के पद पर चयनित हुए थे और उन्हें वर्ष 2002 में आईपीएस (IPS) अवार्ड मिला था। शासन स्तर पर गठित ‘अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति’ की जांच में क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा वर्ष 1984 में जारी किए गए उनके अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित किया जा चुका है।
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जांच में आए अन्य तथ्य: सतर्कता शाखा की जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस सेवा में आने से पहले मीणा ने शासकीय शिक्षक के रूप में अपनी सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया था। पुलिस इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि मूल निवास और जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया नियमों के अनुकूल थी या नहीं।
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आईपीएस अधिकारी का पक्ष: दूसरी ओर, रघुवीर सिंह मीणा का कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद और सही नहीं हैं, तथा उनका यह मामला फिलहाल उच्च न्यायालय की डबल बेंच में विचाराधीन है।
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एक अन्य उपनिरीक्षक पर भी कार्रवाई: इस बीच, जबलपुर से फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र तैयार कर वर्ष 2000-01 में पुलिस विभाग में नौकरी पाने वाले एक उपनिरीक्षक के विरुद्ध भी सीआईडी थाने में अपराध दर्ज किया गया है और उसे सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।




