एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
स्वामित्व योजना पर सीएम मोहन यादव का बड़ा निर्देश: पटवारियों के डर को दूर करते हुए कहा- ‘किसी पर कोई आंच नहीं आएगी, यह सरकार का काम है’
भोपाल: मध्य प्रदेश में ग्रामीण इलाकों की आबादी भूमि पर बने मकानों, दुकानों और भूखंडों की मुफ्त रजिस्ट्री (स्वामित्व योजना) को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। पटवारियों द्वारा भविष्य में कानूनी विवादों में फंसने के डर से रजिस्ट्री करने से हिचकने और योजना के थमने की खबरों के बीच सीएम ने मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पटवारियों का डर दूर किया जाए और उन्हें समझाया जाए कि वे सरकारी दायित्व निभा रहे हैं, इसलिए उन पर कोई आंच नहीं आएगी।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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48 लाख ग्रामीणों की होनी है फ्री रजिस्ट्री: प्रदेश के 48 लाख से अधिक ग्रामीणों की निश्शुल्क रजिस्ट्री की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सरकार लगभग 3,800 करोड़ रुपये के विभिन्न शुल्कों में छूट दे रही है। योजना का शुभारंभ किया जा चुका है, लेकिन पटवारियों के विरोध के कारण प्रक्रिया में रुकावट आ रही थी।
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पटवारियों की आशंका और सरकार का आश्वासन: पटवारियों को डर था कि भविष्य में रजिस्ट्री से जुड़े विवाद होने पर उन्हें कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ सकता है। प्रमुख सचिव रमेश कुमार ने सीएम को अवगत कराया कि पटवारी अपनी पदीय स्थिति में काम कर रहे हैं और राजस्व विभाग रजिस्ट्री करा रहा है, इसलिए न्यायालय जाने की स्थिति नहीं बनेगी। जरूरत पड़ने पर सरकारी वकील पैरवी करेंगे।
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दस्तावेज में स्पष्ट उल्लेख: रजिस्ट्री दस्तावेजों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख रहेगा कि यदि किसी ने गलत या छुपाई गई जानकारी देकर रजिस्ट्री कराई है और मामला अदालत तक पहुंचता है, तो इसके लिए दोषी स्वयं रजिस्ट्रीधारक होगा।
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पोषण आहार और अन्य नीतिगत निर्णय: बैठक में पूरक पोषण आहार वितरण को लेकर भी चर्चा हुई। जब तक भारत सरकार पोषाहार की राशि (वर्तमान में 8 रुपये प्रति हितग्राही से बढ़ाकर 10 रुपये या अधिक करना) नहीं बढ़ा देती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में आंगनबाड़ियों में गर्म भोजन तैयार करने वाले स्वसहायता समूहों की व्यवस्था जारी रहेगी।
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कर्मचारियों के मुद्दों पर अलग से चर्चा: मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, सीधी भर्ती, विभागीय जांच और पेंशन के लंबित मामलों पर सभी विभागों से बिंदुवार जानकारी एकत्र कर नीतिगत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिन पर अलग से विस्तृत चर्चा की जाएगी।




