एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह ठगी मामला: पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल, एसपी ऑफिस का कर्मचारी बनकर नौकरी का झांसा देने वाले संदिग्ध पर अब तक कार्रवाई नहीं
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चर्चित फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह ठगी प्रकरण में अब पुलिस की कार्यप्रणाली और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामले की जांच कर रही बागसेवनिया पुलिस पर आरोप है कि एफआईआर और मुख्य आरोपी के मेमोरेंडम में स्पष्ट रूप से मोबाइल नंबर और नाम होने के बावजूद, संदिग्ध रोहित लिल्हारे को अब तक आरोपी नहीं बनाया गया है। पुलिस अधिकारियों की इस मामले में चुप्पी से जांच की पारदर्शिता पर भी संदेह जताया जा रहा है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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नौकरी के नाम पर ठगी और रोहित लिल्हारे की भूमिका: ख्याति धौलपुरे द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, मार्च 2026 में उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय में नौकरी दिलाने के नाम पर 3 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। कॉल करने वाले ने खुद को एसपी ऑफिस का कर्मचारी बताकर पुलिस वेरिफिकेशन और ज्वाइनिंग का भरोसा दिया था। पीड़ित की एफआईआर और मुख्य आरोपी तृप्ति सिंह के मेमोरेंडम में रोहित लिल्हारे (अयोध्या नगर थाना प्रभारी के रिश्ते के भाई) के मोबाइल नंबर का स्पष्ट उल्लेख है।
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विरोधाभास और पहले दर्ज मामले: इस पूरे प्रकरण में विरोधाभास यह है कि अगस्त महीने में बागसेवनिया थाने में खुद रोहित लिल्हारे की शिकायत पर एमपीटी के होटल-रिजॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर 39 लाख रुपये की ठगी का केस तृप्ति सिंह और उसके भाई के खिलाफ दर्ज हुआ था। इसके अलावा रोहित के एक अन्य दोस्त ने भी 49 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
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एसपी ऑफिस के नाम का दुरुपयोग: पीड़िता को जिस नंबर से कॉल आया था, इंटरनेट पर जांच करने पर वह नंबर भोपाल एसपी ऑफिस के नाम से प्रदर्शित होता था। इसके बावजूद पुलिस यह स्पष्ट करने में नाकाम रही है कि फोन कॉल किसने किया था और एसपी ऑफिस के नाम का गलत इस्तेमाल किस तरह व किसके द्वारा किया गया।
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पुलिस का तर्क और अधिकारियों की चुप्पी: पुलिस का शुरुआती तर्क है कि संभवतः रोहित के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति ने किया हो। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि नंबर सामने आने के बावजूद पुलिस ने वास्तविक कॉलर की पहचान करने और आरोपी को शिकंजे में लेने में अब तक ढिलाई क्यों बरती। इस संवेदनशील मामले पर बागसेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी और डीसीपी विकास शहवाल ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।




