एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल में दर्दनाक हादसा: डीबी मॉल के सामने स्ट्रीट लाइट के पोल में उतरे करंट से युवा अधिवक्ता दिव्यऋषि तिवारी की मौत, नगर निगम और बिजली कंपनी में जिम्मेदारी को लेकर खींचतान
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम और विद्युत विभाग की गंभीर लापरवाही ने एक उभरते हुए युवा की जान ले ली है। डीबी मॉल के सामने स्ट्रीट लाइट के खंभे में दौड़ रहे हाई-वोल्टेज करंट की चपेट में आने से 29 वर्षीय युवा अधिवक्ता और भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आखिरकार खंभे में करंट कैसे पहुंचा और इसके लिए असल जिम्मेदारी किसकी है। नगर निगम और बिजली कंपनी इस मामले में एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने से बचते नजर आ रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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घटना का विवरण: रविवार रात करीब आठ बजे अधिवक्ता दिव्यऋषि तिवारी अपनी महिला मित्र के साथ डीबी सिटी जा रहे थे। मेट्रो स्टेशन के पास वाहन पार्क करने के बाद जैसे ही वे डिवाइडर पार कर रहे थे, दिव्यऋषि का हाथ स्ट्रीट लाइट के पोल से छू गया। तेज करंट लगने से वे दूर जा गिरे और उनकी महिला मित्र को भी झटका लगा। मौके पर मौजूद ट्रैफिक हवलदार ने तुरंत सीपीआर दिया और अस्पताल पहुंचाया, जहां एम्स के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में भी मौत की वजह करंट लगना ही बताई गई है।
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जिम्मेदारी पर विभागों की बयानबाजी: हादसे के बाद से प्रशासन में पल्ला झाड़ने की होड़ लगी है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जीएम प्रदीप सिंह चौहान का कहना है कि यह पोल नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अंतर्गत आता है, जिसका रखरखाव बिजली कंपनी नहीं करती। वहीं, नगर निगम के अपर आयुक्त अक्षय तेम्रवाल का कहना है कि प्रारंभिक निरीक्षण में कोई बड़ी लापरवाही नजर नहीं आई है और जांच की जा रही है कि खंभे में करंट कैसे उतरा।
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शहरभर में खुले तारों का जानलेवा जाल: इस दुखद हादसे के बाद भोपाल की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की पोल खुल गई है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, वीआईपी रोड, और नर्मदापुरम रोड समेत कई प्रमुख मार्गों पर पोल के पास खुले केबल और बाहर लटकते तार आम देखे जा सकते हैं, जो रोजाना हजारों राहगीरों की जान के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं।
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वकीलों का आक्रोश और न्याय की मांग: जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में वकीलों ने एमपी नगर थाने पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच कमेटी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन को सख्त जांच और वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें अपर कलेक्टर सुमित पांडे, सीएमएचओ मनीष शर्मा, विद्युत सुरक्षा कार्यपालन यंत्री मोहम्मद जावेद और बिजली कंपनी के अधीक्षण अभियंता प्रदीप सिंह चौहान शामिल हैं। इस कमेटी को 5 दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।




