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जब गांधीजी के लिए बच्ची ने उतार दी थी अंगूठी, भोपाल रेलवे स्टेशन का वो भावुक नजारा जो इतिहास बन गया

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

गांधी जयंती विशेष: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भोपाल से जुड़े ऐतिहासिक संस्मरण, 1929 में पहली बार आए थे बापू और तीन दिन तक ठहरे थे शहर में

भोपाल: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मध्य प्रदेश और राजधानी भोपाल से एक गहरा और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वर्ष 1929 में बापू पहली बार भोपाल आए थे और यहां तीन दिनों तक प्रवास किया था। इसके अलावा 1933 में अपनी हरिजन यात्रा के दौरान भी वे भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुके थे। गांधी जी के इन ऐतिहासिक पड़ावों और उनसे जुड़ी स्मृतियों के कई अंश आज भी शहर के इतिहास में दर्ज हैं, हालांकि कई ठिकाने समय के साथ बदल चुके हैं।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • वर्ष 1929 का ऐतिहासिक भोपाल प्रवास: भोपाल स्वातंत्र्य आंदोलन स्मारक समिति के संस्थापक सचिव डॉ. आलोक गुप्ता के अनुसार, महात्मा गांधी 8 से 10 सितंबर 1929 तक भोपाल में रहे थे। इस दौरान वे तत्कालीन नवाब के आवास अहमदाबाद पैलेस के पास स्थित ‘राहत मंजिल’ में ठहरे थे, जिसे उस समय खादी से सजाया गया था।

  • राहत मंजिल और बेनजीर मैदान की सभा: 9 सितंबर को राहत मंजिल के प्रांगण में कस्तूरबा गांधी और मीराबेन की उपस्थिति में प्रार्थना सभा हुई थी। वहीं, 10 सितंबर 1929 को बेनजीर मैदान में एक विशाल और ऐतिहासिक जनसभा आयोजित की गई थी, जिसमें पं. माखनलाल चतुर्वेदी, जमनालाल बजाज और तत्कालीन युवा डॉ. शंकर दयाल शर्मा भी शामिल हुए थे। (वर्तमान में राहत मंजिल का अस्तित्व नहीं है, जबकि बेनजीर मैदान आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान की प्रतीक्षा में है)।

  • मोढ़ों की बगिया और हरिजन फंड में सहयोग: भोपाल प्रवास के अंतिम दिन गांधीजी इतवारा स्थित ‘मोढ़ों की बगिया’ पहुंचे थे, जहां गुजराती वणिक मोढ़ समाज ने उनका स्वागत किया और हरिजन फंड के लिए 501 रुपये की राशि भेंट की थी। समाज द्वारा आज भी उस स्थल पर एक पट्टिका लगाई गई है और हर साल गांधी जयंती व 30 जनवरी को प्रार्थना सभा होती है।

  • 1933 की रेलवे स्टेशन की यात्रा और बालिका का त्याग: वर्ष 1933 में अपनी हरिजन यात्रा के दौरान जब गांधीजी ट्रेन बदलने के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुके, तो भारी भीड़ जमा हो गई थी। बापू के आह्वान पर एक छोटी सी बालिका ने अपनी अंगूठी दान कर दी थी, जो उनके जीवन का एक प्रेरणादायी प्रसंग है।

  • पारेख ब्रदर्स की दुकान और ऐतिहासिक धरोहर: पुराने भोपाल के चौक क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक ‘पारेख ब्रदर्स’ की दुकान से भी बापू की यादें जुड़ी हैं। संचालक सुनील जय पारेख के अनुसार, उनकी दादी नगीनादेवी पारेख ने मोढ़ समाज की महिलाओं के साथ अपने आभूषण दान किए थे और उनके परिवार के पास आज भी गांधीजी के हस्ताक्षर वाला एक दुर्लभ पत्र सुरक्षित है।

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