एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
एम्स भोपाल में बड़ा हंगामा: आउटसोर्स एजेंसी द्वारा 260 कर्मचारियों को हटाने के विरोध में हुआ धरना-प्रदर्शन, प्रबंधन के हस्तक्षेप के बाद सभी कर्मचारी बहाल
भोपाल: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल में आउटसोर्स एजेंसी की मनमानी और बिना सूचना के 260 कर्मचारियों को हटाए जाने के मामले में बुधवार रात से शुरू हुआ हंगामा गुरुवार को समाप्त हो गया। लगभग 500 कर्मचारियों के रातभर चले धरने और विरोध-प्रदर्शन के कारण अस्पताल की ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित हुईं और करीब 800 मरीजों का इलाज बाधित हुआ। हालांकि, मामला तूल पकड़ने पर एम्स प्रबंधन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एजेंसी के संचालकों के साथ बैठक की, जिसके बाद सभी निकाले गए कर्मचारियों को वापस सेवा में रखने पर सहमति बन गई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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बिना सूचना निकाले गए थे 260 कर्मचारी: एम्स में हाउसकीपिंग, वार्ड बॉय और प्लंबर का कार्य ‘एमजे एजेंसी’ के माध्यम से आउटसोर्स पर संचालित होता है। एजेंसी के कुल 1100 कर्मचारियों में से नई व्यवस्था के तहत बिना किसी पूर्व सूचना के 260 कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई थी, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया।
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रातभर ओपीडी के बाहर चला धरना: बुधवार रात करीब 500 कर्मचारियों ने एम्स की ओपीडी के बाहर रातभर धरना दिया और गुरुवार सुबह प्रशासनिक भवन (कौटिल्य भवन) के सामने प्रदर्शन किया, जिससे सुबह से ही रजिस्ट्रेशन काउंटर और ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो गईं।
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मरीजों को हुई भारी परेशानी: इस विरोध प्रदर्शन के चलते गुरुवार को एम्स की कुल ओपीडी घटकर 5420 रह गई (जो सामान्य दिनों में 6200 से 6500 के बीच रहती है)। दूर-दराज (जैसे रायसेन और विदिशा) से आए मरीजों को पर्चे बनवाने के लिए लंबी कतारों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कई मरीजों के समय पर पर्चे तक नहीं बन सके।
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प्रमुख विभागों की ओपीडी पर असर (30 सितंबर बनाम 1 अक्टूबर):
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मेडिसिन: 950 से घटकर 720
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सर्जरी: 680 से घटकर 510
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आर्थोपेडिक्स: 620 से घटकर 480
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स्त्री एवं प्रसूति: 580 से घटकर 430
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कार्डियोलॉजी/नेफ्रोलॉजिकल: 450 से घटकर 320
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कर्मचारियों के गंभीर आरोप: आंदोलनरत कर्मचारियों ने एजेंसी पर नौकरी के नाम पर लेन-देन, बोनस न देने, वेतन से मनमाने तरीके से कटौती करने और पीएफ (PF) जमा न करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए।
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प्रबंधन का त्वरित एक्शन और समाधान: मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स प्रबंधन ने तुरंत हस्तक्षेप किया और एमजे एजेंसी के संचालकों को तलब किया। लंबी चर्चा के बाद प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी को सेवा से नहीं हटाया गया है और सभी 260 कर्मचारी अपने काम पर वापस लौट आए हैं। प्रबंधन ने मरीजों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।




