एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) टेक्नोलॉजी डेस्क
ग्लोबल AI डिबेट और भारत की रणनीति: दुनिया भर में एआई की रफ्तार धीमी करने की चर्चा के बीच, भारत का फोकस स्वदेशी मॉडल और कंप्यूट क्षमता मजबूत करने पर
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बदलती दुनिया के बीच इन दिनों वैश्विक स्तर पर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। कई बड़ी टेक कंपनियां और संस्थाएं ‘फ्रंटियर AI’ के विकास की रफ्तार को थोड़ा नियंत्रित करने की वकालत कर रही हैं, ताकि इसके संभावित जोखिमों और सुरक्षा खतरों से निपटा जा सके। हालांकि, ग्लोबल परिदृश्य से अलग भारत का रुख और रणनीति पूरी तरह से व्यावहारिक और देश की जरूरतों पर केंद्रित है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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ग्लोबल डिबेट बनाम भारत का नज़रिया: दुनिया भर में एआई विकास को धीमा करने की चर्चा के बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का स्पष्ट मानना है कि भारत अभी उस स्तर पर नहीं है जहां दुनिया के सबसे बड़े फ्रंटियर मॉडल तैयार हो रहे हैं। देश का मुख्य जोर ऐसे स्वदेशी एआई मॉडल और एप्लीकेशन विकसित करने पर है जो आम नागरिकों की जरूरतों के लिए ज्यादा उपयोगी हों।
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IndiaAI मिशन के तहत बड़े कदम: भारत सरकार के ‘IndiaAI मिशन’ के तहत 20 स्वदेशी AI मॉडल प्रस्तावों को समर्थन के लिए चुना गया है, जिसमें 12 बड़े भाषा मॉडल (LLMs) और 8 छोटे भाषा मॉडल शामिल हैं:
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Sarvam: 30 अरब और 105 अरब पैरामीटर वाले मॉडल।
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Gnani.ai: स्पीच-टू-स्पीच (speech-to-speech) मॉडल।
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BharatGen: मल्टी-लैंग्वेज फाउंडेशन मॉडल।
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Avataar AI: वीडियो जनरेशन मॉडल।
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कंप्यूट क्षमता और बुनियादी ढांचे का विकास: सरकार केवल मॉडलों तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटासेट, एआई टैलेंट, एप्लीकेशन और सस्ती कंप्यूटिंग क्षमता (Computing Power) को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत जुलाई तक 237 प्रोजेक्ट मंजूर किए जा चुके हैं, 93 लाख GPU घंटे आवंटित किए गए हैं और 15 कंप्यूट सर्विस प्रोवाइडर्स को सूचीबद्ध किया गया है।
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अमेरिका-चीन की होड़ से अलग भारत की चुनौती: वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन फ्रंटियर स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जहां अमेरिका में विकास धीमा होने से चीन को बढ़त मिलने की चिंता भी जताई जा रही है। इसके विपरीत, भारत के लिए अपनी डिजिटल नींव, कंप्यूटिंग पावर और स्वदेशी इकोसिस्टम को मजबूत करने का यह सही समय है।
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साइबर सुरक्षा और नियम: सरकार AI से जुड़े सुरक्षा खतरों और साइबर सुरक्षा के मामलों को लेकर पूरी तरह सतर्क है। सुरक्षा मानकों को और बेहतर बनाने के लिए नियमों की रूपरेखा को लगातार अपडेट किया जा रहा है, ताकि विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सके।




