Bhopal Breaking news Latest News MP Polictics

भोपाल Master Plan-2047 में 27% हरियाली का दावा, आम नागरिकों के लिए पार्क सिर्फ 0.66%

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

भोपाल मास्टर प्लान-2047 के हरियाली के दावों पर उठे सवाल: 27% ग्रीन कवर का दावा कागजी बाजीगरी, पूरे क्षेत्र में वास्तविक हरियाली सिर्फ 16% और पार्क मात्र 0.66%

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के भविष्य को तय करने वाले ‘मास्टर प्लान-2047’ के ड्राफ्ट में हरियाली को लेकर किए गए दावों पर सवाल उठने लगे हैं। मास्टर प्लान के प्रारूप में शहर के हरित क्षेत्र को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का दावा किया गया है, जिसे लेकर विशेषज्ञों ने आंकड़ों की बाजीगरी करार दिया है। पड़ताल में सामने आया है कि पूरे योजना क्षेत्र में वास्तविक हरियाली महज 16 प्रतिशत के आसपास है, जबकि आम नागरिकों के लिए पार्क (G-1 श्रेणी) का हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 27% हरियाली के दावे की हकीकत: राजपत्र में प्रकाशित तालिका के अनुसार, 27 प्रतिशत का यह आंकड़ा पूरे योजना क्षेत्र का नहीं, बल्कि केवल भाग-‘अ’ (लगभग 61,017 हेक्टेयर) के दायरे पर आधारित है। यदि पूरे 1,01,690 हेक्टेयर के संपूर्ण योजना क्षेत्र को आधार माना जाए, तो वास्तविक हरित क्षेत्र केवल 14.45% (ईएसजेड मिलाकर 16.22%) ही बैठता है।

  • मौजूदा जंगलों को नया ग्रीन बताकर गिनाया गया: ड्राफ्ट में दिखाए गए कुल 14,698 हेक्टेयर ग्रीन क्षेत्र में से लगभग 63 प्रतिशत हिस्सा (9,208 हेक्टेयर) नगर वन और वनीकरण (G-5 श्रेणी) का है, जिसमें वन विभाग के स्वामित्व वाले वे जंगल शामिल हैं जो दशकों से पहले से मौजूद हैं। इसके अलावा भोजताल प्रभाव क्षेत्र और जल-निकायों के बफर जोन को भी इसमें जोड़ लिया गया है।

  • प्रति व्यक्ति सिर्फ 1.5 वर्ग मीटर खुला स्थान: मास्टर प्लान में 45 लाख की अनुमानित आबादी का अनुमान लगाया गया है, जिसके मुकाबले पार्कों (G-1) के लिए केवल 670.93 हेक्टेयर यानी महज 0.66 प्रतिशत जगह ही छोड़ी गई है। इसका सीधा मतलब है कि शहर के एक नागरिक के हिस्से औसतन केवल 1.5 वर्ग मीटर पार्क आ रहा है, जो एक दरी बिछाने जितनी जगह भी नहीं है।

  • सेंट्रल या रीजनल पार्कों का अभाव: घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए किसी नए सेंट्रल या रीजनल पार्क का ठोस प्रस्ताव नहीं है। इसके अलावा, भानपुर खंती को पार्क श्रेणी में रखकर वहां आम जनता की पहुंच से दूर गोल्फ कोर्स बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

  • विशेषज्ञों की मांग: पर्यावरण और नगरीय मामलों के विशेषज्ञों (जैसे पूर्व निदेशक डॉ. एचएम मिश्रा) का कहना है कि सरकार को कागजी आंकड़े दिखाने के बजाय जमीन पर वास्तविक पार्क आरक्षित करने चाहिए और ड्राफ्ट की तालिकाओं के विरोधाभास को दूर करना चाहिए।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply