एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) राज्य ब्यूरो / भोपाल डेस्क
मध्य प्रदेश का वित्तीय प्रबंधन: अधोसंरचना विकास पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी राज्य सरकार; छह माह में लिया 37 हजार करोड़ का कर्ज, मजबूत है वित्तीय स्थिति
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार इस वित्तीय वर्ष के अंत (31 मार्च) तक राज्य के अधोसंरचना (Infrastructure) विकास कार्यों पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों में सरकार द्वारा 37 हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया गया है, जबकि केंद्र सरकार ने पूरे वर्ष के लिए 87 हजार करोड़ रुपये की ऋण सीमा निर्धारित की है। राहत की बात यह है कि इस ऋण की अधिकांश राशि का उपयोग पूरी तरह से पूंजीगत परिसंपत्तियों और विकास कार्यों के सृजन में किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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विकास कार्यों पर खर्च होगी कर्ज की राशि: सरकार का स्पष्ट रुख है कि लिए गए ऋण का उपयोग वेतन या लाड़ली बहना जैसी सामाजिक दायित्व की योजनाओं (दैनंदिन राजस्व व्यय) के लिए बिल्कुल नहीं किया जा रहा है। ऋण की पूरी राशि सड़क, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई, बांध, नहर, विद्युत, मेडिकल कॉलेज, स्कूल-कॉलेज और बड़ी परियोजनाओं पर खर्च हो रही है।
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प्रमुख जल लिंक परियोजनाएं शामिल: इस खर्च में केन-बेत्वा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी शामिल हैं, जिनके लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
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जनता पर अतिरिक्त कर का बोझ नहीं: वित्त विभाग के अनुसार, विकास कार्यों के लिए जनता पर किसी भी तरह के असामान्य कर (Tax) का बोझ नहीं डाला गया है। राशि जीएसडीपी (GSDP) के अनुरूप निर्धारित ऋण सीमा और राज्य के अपने संसाधनों से जुटाई जा रही है।
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मजबूत वित्तीय प्रबंधन और समय पर पुनर्भुगतान: मध्य प्रदेश का वित्तीय प्रबंधन बेहद मजबूत माना जाता है। पूर्व वर्षों में लिए गए ऋणों का शत-प्रतिशत पुनर्भुगतान समय पर किया गया है और राज्य ने कभी भी इस दायित्व को निभाने में डिफॉल्ट नहीं किया है। बाजार से न्यूनतम और अनुकूल ब्याज दरों पर ऋण प्राप्त करने के लिए आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है।
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आर्थिक मानक और जीएसडीपी में वृद्धि:
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मप्र का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 32.53 प्रतिशत है, जो निर्धारित मानकों के बिल्कुल अनुरूप है।
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ब्याज भुगतान एवं राजस्व प्राप्तियों का अनुपात मात्र 10-11 प्रतिशत बना हुआ है, जिसे वित्तीय सुरक्षा का बेहद सुरक्षित स्तर माना जाता है।
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विशेषज्ञों की राय: आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि निर्धारित सीमा के भीतर लिया गया कर्ज जब महाकाल महालोक जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स या पर्यटन विकास पर खर्च होता है, तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जीएसडीपी में भी वृद्धि होती है।




