एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में ‘स्वामित्व योजना’ का प्रभावी क्रियान्वयन: 17 जिलों के 82 हितग्राहियों को मिले मालिकाना हक के दस्तावेज; ड्रोन सर्वे से मिल रहा संपत्ति का वैधानिक अधिकार
भोपाल: मध्य प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को उनकी अचल संपत्ति का कानूनी और वैधानिक अधिकार दिलाने की दिशा में ‘स्वामित्व योजना’ मील का पत्थर साबित हो रही है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को प्रदेश के 17 जिलों के 82 पात्र हितग्राहियों को उनकी संपत्ति के मालिकाना हक के आधिकारिक दस्तावेज (प्रमाण पत्र) सौंपे गए। डिजिटल तकनीक और आधुनिक ड्रोन सर्वे के माध्यम से ग्रामीण संपत्तियों के रिकॉर्ड को पारदर्शी और सुगम बनाया जा रहा है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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विभिन्न जिलों के हितग्राहियों को लाभ: स्वामित्व योजना के तहत हाल ही में छिंदवाड़ा जिले में सबसे अधिक 34 हितग्राहियों को लाभ मिला है। इसके अलावा हरदा में 10, सिंगरौली में 6, डिंडौरी, मंडला व रायसेन में 5-5, अनूपपुर, उमरिया व नरसिंहपुर में 3-3, तथा अशोकनगर, आलीराजपुर, कटनी, ग्वालियर, बालाघाट, श्योपुर, सागर और सीधी में 1-1 हितग्राही के संपत्ति दस्तावेजों का सफल पंजीयन पूरा किया गया है।
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ड्रोन तकनीक से सटीक सर्वेक्षण: इस योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में बने मकानों और भूखंडों का आधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए सटीक सर्वेक्षण कर संपत्ति अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं।
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बैंक लोन और वित्तीय सुविधाओं का लाभ: मालिकाना हक के दस्तावेज मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर कानूनी अधिकार का स्पष्ट प्रमाण मिल जाता है। इसके आधार पर वे आसानी से बैंकों से ऋण (लोन) और अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
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डिजिटल प्रक्रिया (‘सारा ऐप’ और ‘संपदा 2.0’): छिंदवाड़ा के बिछुआ विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया कला में आयोजित जनविश्वास शिविर के दौरान पटवारी द्वारा ‘सारा ऐप’ और ‘संपदा 2.0’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संपत्ति पंजीयन व सत्यापन की पूरी प्रक्रिया का डिजिटल प्रदर्शन भी किया गया।
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पारदर्शिता और सुगमता: इस व्यवस्था से ग्रामीण भारत में भूमि विवादों में कमी आ रही है और सरकारी सेवाओं तक नागरिकों की पहुंच अधिक पारदर्शी व सरल हो रही है।




