एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) इंदौर / भोपाल डेस्क
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के आंकड़े उजागर: दो साल में योजनाओं से जुड़े 45 केस दर्ज, पंच परमेश्वर योजना में सर्वाधिक गड़बड़ियां; 91% मामलों में रंगे हाथों पकड़ाए अफसर
इंदौर: मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में सरकारी योजनाओं में धांधली को लेकर जहां एक तरफ ताबड़तोड़ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, वहीं लोकायुक्त की कार्रवाई में रिश्वत लेते पकड़े जाने (ट्रैप केस) के मामलों ने प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में लोकायुक्त द्वारा दर्ज कुल अपराधों में से लगभग 91 प्रतिशत मामले रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े जाने से जुड़े हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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सरकारी योजनाओं में 45 प्रकरण दर्ज: 4 सितंबर 2024 से 6 अक्टूबर 2026 के बीच सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार से जुड़े कुल 45 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इसमें सबसे अधिक 18 मामले ‘पंच परमेश्वर योजना’ से जुड़े हैं।
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विभिन्न योजनाओं में गड़बड़ियों का दायरा:
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पंच परमेश्वर योजना: 18 केस
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प्रधानमंत्री कुटीर निर्माण योजना: 5 केस
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प्रधानमंत्री सीसी रोड निर्माण: 4 केस
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मनरेगा (पशुपालन योजना): 3 केस
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प्रधानमंत्री सोलर पैनल सब्सिडी योजना: 2 केस
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इसके अलावा मनरेगा के तहत बाउंड्रीवाल निर्माण, शौचालय रिपेयरिंग, प्रधानमंत्री सड़क निर्माण, संबल योजना, बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े प्रकरण भी शामिल हैं।
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लोकायुक्त के वर्ष 2026 के आंकड़े (91% ट्रैप केस):
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लोकायुक्त इंदौर द्वारा इस वर्ष कुल 44 अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं।
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इनमें से 40 मामले ट्रैप (रिश्वत लेते पकड़े जाने) के हैं, जो कुल मामलों का लगभग 91 प्रतिशत है।
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इसके अलावा पद के दुरुपयोग का 1 और आय से अधिक संपत्ति (छापे) के 3 मामले दर्ज किए गए हैं।
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न्यायालयीन कार्रवाई और सजा: लोकायुक्त के इन आंकड़ों में से 27 मामलों में न्यायालय में चालान पेश किया जा चुका है, जबकि 6 मामलों में दोषियों को सजा भी सुनाई जा चुकी है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई की स्थिति को दर्शाता है।




