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‘सवाल पूछना जुर्म नहीं…’, CJP प्रोटेस्ट को हुमा कुरैशी का समर्थन, विजय वर्मा ने भी कसा तंज

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) मनोरंजन एवं कला डेस्क

दिल्ली में सीजेपी (CJP) प्रदर्शन और चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर बॉलीवुड कलाकारों की प्रतिक्रिया: हुमा कुरैशी और विजय वर्मा ने किया समर्थन

मुंबई: दिल्ली से लेकर देश के अन्य हिस्सों में वोट घोटाले के मामले और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे ‘सीजेपी प्रोटेस्ट’ (CJP Protest) पर अब बॉलीवुड कलाकारों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। दिल्ली और मुंबई पुलिस द्वारा पिछले दिनों प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद फिल्म इंडस्ट्री के कई जाने-माने चेहरे मुखर हो गए हैं। शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह के बाद अब अभिनेता विजय वर्मा और अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी इस प्रदर्शन का खुला समर्थन किया है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • विजय वर्मा का तंज: अभिनेता विजय वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसते हुए एक पोस्ट शेयर की, जिसमें लिखा था—“स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का चेहरा” और साथ ही कैप्शन में लिखा, “हमारे राष्ट्रीय नायक को बचाने के लिए सभी ताकतों को एक साथ आते देखकर खुशी हुई। उनकी हर कीमत पर रक्षा करें।”

  • हुमा कुरैशी का लंबा बयान और हिरासत की निंदा: अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन व जवाबदेही की मांग करना कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि हमारा बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है।

  • राजनीतिक दलों से दूरी और नागरिकों का समर्थन: हुमा ने स्पष्ट किया कि उनका यह समर्थन किसी विशेष राजनीतिक दल या व्यक्ति के लिए नहीं है, बल्कि उन आम नागरिकों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के पक्ष में है जो अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं।

  • “छिपाने के लिए कुछ नहीं है”: अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अंदेशा है कि इस तरह खुलकर अपनी बात रखने पर उन्हें आलोचना, सोशल मीडिया ट्रोलिंग या वित्तीय जांच जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन देश के प्रति उनके प्रेम के कारण वे चुप नहीं बैठ सकतीं। उन्होंने अंत में जोर देते हुए कहा कि आंख मूंदकर आज्ञा मानना लोकतंत्र नहीं है और असहमति कभी देश-विरोधी नहीं होती।

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