एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: डिजिटल संचार को सुरक्षित बनाने के लिए सभी सरकारी अधिकारियों के लिए स्वदेशी ‘जोहो’ (Zoho) मेल अनिवार्य
भोपाल: मध्य प्रदेश शासन ने राज्य की सरकारी इंटरनेट कम्युनिकेशन और डिजिटल संचार व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। बढ़ते साइबर हमलों, डेटा लीक के जोखिम और विदेशी क्लाउड स्टोरेज पर निर्भरता को खत्म करने के उद्देश्य से सरकार ने नए निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत अब राज्य के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आधिकारिक ईमेल संचार हेतु स्वदेशी प्लेटफॉर्म जोहो (Zoho) का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत पहल: यह पहल केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के उस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य सरकारी डिजिटल संचार को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है। राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MP-SEDC) और एनआईसी के बीच भोपाल में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
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नहीं बदलेगा सरकारी डोमेन: इस नई व्यवस्था से अधिकारियों के ईमेल पतों के डोमेन में कोई बदलाव नहीं होगा। ईमेल आईडी के अंत में आने वाला आधिकारिक डोमेन (जैसे
@nic.inया@mp.gov.in) पहले की तरह ही सुरक्षित रहेगा। केवल इसका बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर अब गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के बजाय स्वदेशी ‘जोहो’ के सुरक्षित क्लाउड पर शिफ्ट किया जा रहा है। -
डेटा रहेगा देश के भीतर और सुरक्षित: जोहो एक भारतीय निजी आईटी एवं सॉफ्टवेयर कंपनी है, जिसके सर्वर भारत में ही स्थित हैं। यह एनआईसी के रणनीतिक नियंत्रण के तहत कार्य करती है और CERT-In के सुरक्षा ऑडिट व जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर नियमों का पालन करती है, जिससे सरकारी और संवेदनशील डेटा देश की सीमाओं के भीतर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
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इनएक्टिव अकाउंट्स पर नियम (45 दिन की अवधि): नई व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक यूजर (अधिकारी-कर्मचारी) को महीने में कम से कम एक बार अपने ईमेल का उपयोग करना होगा। यदि कोई अधिकारी लगातार 45 दिनों तक अपने ईमेल इनबॉक्स में लॉगिन नहीं करता है, तो सुरक्षा कारणों से वह खाता स्वतः इनएक्टिव हो जाएगा।
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वार्षिक सेवा शुल्क: राज्य सरकार प्रत्येक मेल-बॉक्स आधारित ईमेल आईडी के मेंटेनेंस के लिए प्रति यूजर 2,000 रुपये वार्षिक सेवा शुल्क का भुगतान करेगी, जिससे अधिकारियों को एक डेडिकेटेड इनबॉक्स और सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज की सुविधा मिलेगी।




