एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल डेस्क टीम
ओबीसी आरक्षण पर सियासी और कानूनी हलचल तेज: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से की मुलाकात, हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार तलाश रही कानूनी विकल्प
भोपाल: मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी सरगर्मी काफी तेज हो गई है। हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 27% ओबीसी कोटे से जुड़े 2019 के संशोधन कानून को असंवैधानिक करार दिए जाने और कोटे को पुनः 14 प्रतिशत पर सीमित करने के फैसले के बाद राज्य सरकार सक्रिय हो गई है. इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात कर इस मामले के कानूनी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया है.
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कानूनी विकल्पों पर विचार: एमपी हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद जिसमें अदालत ने 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा और अन्य वैधानिक बिंदुओं का हवाला देते हुए 27% कोटे की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं, राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने और आगे की कानूनी रणनीति तैयार करने में जुट गई है।
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मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय भेंट: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली पहुंचकर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कानूनी सलाह ली है ताकि प्रभावित भर्तियों और आगामी विधिक प्रक्रिया पर स्पष्ट कदम उठाए जा सकें.
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विपक्ष का हमला और विशेष सत्र की मांग: दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आक्रामक मुद्रा में है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यदि सरकार वास्तव में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में है, तो उसे कोर्ट के पाले में गेंद डालने के बजाय विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर नया विधेयक पारित कराना चाहिए.
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भर्ती परीक्षाओं और 13% होल्ड पदों पर असर: हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की शासकीय भर्तियों और लंबे समय से अटके 13 प्रतिशत होल्ड पदों की स्थिति को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर मंथन शुरू हो गया है, जिस पर युवाओं और छात्र संगठनों की निगाहें टिकी हुई हैं.




