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MP में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के नियम बदले; 5 करोड़ की विन्यास निधि होगी रिफंड, जरूरी नहीं FDR

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)

भोपाल / शिक्षा एवं शासन डेस्क

मध्य प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों को बड़ी राहत: अब 5 करोड़ की विन्यास निधि जमा करने की अनिवार्यता खत्म; इसके बदले चुकानी होगी 5 लाख रुपये वार्षिक फीस

भोपाल: मध्य प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों के संचालन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। राज्य के निजी विश्वविद्यालयों को अब 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम विन्यास निधि (Endowment Fund) जमा रखने की अनिवार्यता से राहत दे दी गई है। शासन ने पहले से जमा कराई गई इस निधि को संबंधित निकायों को वापस लौटने का निर्णय लिया है। हालांकि, इसके एवज में अब प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय को मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को हर साल 5 लाख रुपये वार्षिक फीस के रूप में चुकानी होगी।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • राजपत्र में अधिसूचना जारी: उच्च शिक्षा विभाग ने ‘मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) नियम, 2008’ में संशोधन कर दिया है, जिसकी आधिकारिक अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है।

  • वापस मिलेगी विन्यास निधि और शर्तें: विश्वविद्यालयों द्वारा पूर्व में सावधि जमा (FDR) के रूप में रखी गई राशि उसकी परिपक्वता के एक महीने के भीतर संबंधित निकाय को लौटा दी जाएगी। हालांकि, शर्त यह है कि लौटाई गई इस राशि का उपयोग विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास कार्यों में ही करना अनिवार्य होगा।

  • 5 लाख रुपये वार्षिक फीस और पेनाल्टी: अब निजी विश्वविद्यालयों को हर साल 5 लाख रुपये वार्षिक फीस मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को देनी होगी। इस राशि का भुगतान प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 1 मई तक करना अनिवार्य होगा। समयसीमा पर भुगतान न करने पर 5,000 रुपये प्रतिमाह तक की पेनल्टी लग सकती है।

  • विद्यार्थियों की फीस का देना होगा पूरा हिसाब: संशोधित नियमों के तहत विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रमवार छात्रों की संख्या, उनसे ली जाने वाली मासिक फीस और कुल प्राप्त आय का पूरा विवरण देना होगा। इस वित्तीय ब्योरे का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव (Registrar) और मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी (CFO) द्वारा किया जाएगा।

  • आयोग के पास रहेगा फीस संशोधन का अधिकार: नए प्रावधानों के मुताबिक, विनियामक आयोग राज्य सरकार की सहमति से समय-समय पर इस वार्षिक फीस की राशि में संशोधन कर सकेगा। इस फीस से मिलने वाली राशि का उपयोग आयोग अपने वैधानिक कार्यों के संचालन और बैंक एफडी के रूप में करेगा।

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