Bhopal Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश में बिजली कंपनियां कर रही सरकार के निर्देशों की अनसुनी।अपनी मर्ज़ी से चल रहा है शटडाउन का प्लान।

भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती और पानी की समस्या पूरे प्रदेश में उत्त्पन हो रही है। इसके बावजूद सरकार से रविवार को बिजली कटौती के निर्देश मिलने के बाद भी प्रदेश की तीनों ही बिजली कंपनियां अपने ही शटडाउन प्लान के मुताबिक कटौती कर रही हैं। इधर, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार को बिजली कर्मियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना किसी कारण के बिजली गुल होने पर जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा- बिजली सरप्लस होने के बाद भी कटौती होना गंभीर है।

मुख्यमंत्री ने इसके लिए जवाबदेह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के पूर्व भी अघोषित कटौती की वजह से करीब सात सौ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को 24 घंटे और कृषि कार्य के लिए 10 घंटे निरंतर बिजली मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बारिश के पूर्व होने वाले मेंटेनेंस के लिए बिजली कटौती का समय इस तरह निर्धारित करने को कहा जिससे आम जनता को कोई परेशानी न हो।

समस्या को राजनैतिक रूप देते हुए नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बिजली कर्मचारी असहयोग कर रहे हैं, यह कहकर प्रदेश सरकार अपनी अक्षमता नहीं छिपा सकती है। उन्होंने कहा- भाजपा सरकार में मप्र बिजली में सरप्लस रही, लेकिन कांग्रेस सरकार बनते ही कटौती शुरू हो गई। अगर कर्मचारी सरकार की नहीं सुन रहे हैं तो यह सरकार की अक्षमता को दर्शाता है।

क्या वजह है बिजली कटौती की।

ऊर्जा विभाग के एसीएस आईसीपी केशरी के निर्देश के बाद भी बिजली कंपनी अपने ही शटडाउन प्लान पर कार्य कर रही है। रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंंसिंग में केशरी ने प्रदेशभर में सुबह 6 से 10 बजे तक शटडाउन कर बिजली लाइनों के रख-रखाव के निर्देश दिए थे, लेकिन इस प्लान पर काम नहीं हो रहा। साथ ही तीनों विद्युत वितरण कंपनियाें में 45 हजार मैदानी अमला है। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारी की है, जाे 55 वर्ष से ज्यादा के हैं। कर्मचारियों को आउटसोर्स भी किया गया है। यही वजह है कि कई बार मुस्तैदी से काम नहीं हो पाता और शिकायत दूर करने में समय लग जाता है।

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