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विशेष ब्लॉग : बायोपिक के नाम पर मोदी को भगवान के रूप में परोसती अंध भक्त ओमंग कुमार की फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बानी फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी को भले ही बायोपिक कहा गया है, लेकिन इसे देखने के बाद ऐसा महसूस होता है कि डायरेक्टर ओमंग कुमार ने यह फिल्म बस दो घंटे तक मोदी की तारीफ के लिए बनाई है। इस फिल्म में मोदी को एक ऐसी शख्सियत बताया गया है, जो कि नेकी में भगवान से कम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार एक बायोपिक तभी दिलचस्प हो सकती है, जब आप एक इंसान के जीवन को ईमानदारी से दिखाएं। आप भले ही उनकी अच्छाई पर ज्यादा ध्यान दें, लेकिन जो बुराई उनमे है वह भी दर्शाए। ताकि दर्शक आपकी कहानी पर विश्वास कर सकें।

लेकिन ओमंग कुमार ने ऐसा नहीं किया और नतीजा यह रहा कि उनकी फिल्म ज्यादातर बोर करती है। हैरत की बात है कि डायरेक्टर अपनी बात मनवाने के लिए अपने देश के इतिहास को भी तोड़ मरोड़ के पेश करते हैं। कई दर्शकों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा की ओमंग में और भाजपा आईटी सेल और ज़्यादातर मीडिया ग्रुप्स में कोई फ़र्क़ नहीं है, क्यू के ये सब मोदी की वाह वही के अलावा और कोई दूसरा काम नहीं कर रहे हैं।

4 पॉइंट्स में जानिए कैसी है फिल्म
सच दिखाने से ज्यादा मोदी को संत बताने पर फोकस

मोदीजी की जिंदगी की विवादित घटनाओं जैसे उनकी शादी, गुजरात में हुए दंगे उन पर लगे आरोप आदि को बिल्कुल ही बदलकर दिखाया गया है। कहानी सच को पेश करने से ज्यादा यह दिखाने की कोशिश करती है कि मोदी एक संत हैं और वो बस जिंदगीभर दूसरों की निस्वार्थ सेवा में जुटे रहे। फिल्म देखने के बाद समझ आता है कि चुनाव आयोग ने इसे इलेक्शन के वक्त रिलीज होने से क्यों रोका था। फिल्म के स्क्रीनप्ले में इतना इमेजिनेशन है कि एक सीन में तो खुद मोदीजी आर्मी के साथ कश्मीर में आतंकवादियों से लड़े और बर्फीले पहाड़ों की चोटी पर भारत का झंडा फहरा दिया।

ओमंग कुमार ने चुनी अंध भक्ति की राह

ओमंग कुमार ने एक अच्छा मौका खो दिया, जिसमें वो मोदीजी के करिश्माई व्यक्तित्व पर ध्यान केंद्रित कर सकते थे। गरीब परिवार में पल-बढ़कर प्रधानमंत्री बनने तक की मोदीजी की प्रेरणादायक कहानी को अगर ईमानदारी से कहा जाता तो फिल्म काफी दिलचस्प होती। लेकिन उन्होंने अंध भक्ति की राह चुनी।

मोदी को संत मानने वालों के लिए है फिल्म

फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है, जो आपको मोदीजी के जीवन की सच्ची झांकी दिखाए। अगर आप उन्हें करिश्माई नेता से ज्यादा ऐसा संत समझते हैं, जिसमें कोई ऐब नहीं तो आप यह फिल्म देख सकते हैं।

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