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अब तक 26 एफआईआर, 46 आरोपियों को किया गिरफ्तार

 

मध्य प्रदेश में दो महीने चले इस अभियान में पुलिस 50 मोबाइल फोन, 80 सिम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, 91 एटीएम कार्ड, तीन चेक बुक, दो बैंक किट, ए …और पढ़ें

MP में म्यूल खातों के विरुद्ध 'ऑपरेशन मैट्रिक्स' : अब तक 26 एफआईआर, 46 आरोपियों को किया गिरफ्तार

साइबर अपराधियों पर पुलिस का शिकंजा। – प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. तीन अंतरराज्यीय और एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भी पता चला
  2. पहले चरण में प्रथम लेयर के तीन हजार खातों की हुई पड़ताल
  3. अकाउंट के लिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को फंसाते थे

भोपाल। साइबर ठग कम पढ़े-लिखे लोगों को लोन या लाटरी का लालच देकर उनके खाते का उपयोग ठगी की राशि रखने के लिए कर रहे हैं। मध्य प्रदेश राज्य साइबर सेल द्वारा म्यूल खातों के विरुद्ध चलाए गए ऑपरेशन ‘मैट्रिक्स’ में प्रदेश के 12 जिलों में 26 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसमें 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। बड़ी बात यह कि इनमें तीन अंतरराज्यीय और एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पता चला है।

पहले चरण में प्रथम लेयर के तीन हजार म्यूल खातों की जांच की गई है। इसमें वे खाते शामिल हैं, जिनमें सबसे पहले ठगी की राशि पहुंची है। अभियान के अंतर्गत आगे के चरणों में दूसरे और तीसरे लेयर के खातों की पड़ताल की जाएगी। बता दें कि राज्य साइबर सेल ने इसके पहले फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी करने और सिम लेने वालों के विरुद्ध अभियान चलाया था।

 

कुछ और एफआईआर दर्ज की जा सकती है

लगभग दो माह चले इस अभियान में पुलिस 50 मोबाइल फोन, 80 सिम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, 91 एटीएम कार्ड, तीन चेक बुक, दो बैंक किट, एक वाई-फाई बाक्स, दो मुहर, चार लाख रुपये नकद जब्त किए हैं, जबकि 13 लाख रुपये आरोपियों से संबंधित बैंक खातों में फ्रीज कराए गए हैं। एक नेक्सन कार और स्कूटी भी जब्त की गई है। अभी भी जिलों और साइबर जोनल कार्यालयों द्वारा म्यूल खातों की जांच की जा रही है, जिससे कुछ और एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं।

पांच से 10 हजार रुपये का लालच देकर फंसाते हैं

एसपी साइबर प्रणय नागवंशी ने बताया कि आरोपी ठग मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को फंसाते थे। उन्हें पांच से 10 हजार रुपये लालच देकर और रोजगार दिलाने के नाम पर उनका नया बैंक खाता खुलवाते थे। आरोपियों का तरीका यह भी रहा है कि पहले खुले खाते की पूरी किट, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग का यूजर आईडी और पासवर्ड प्राप्त कर लेते थे, जिससे साइबर फ्राड की राशि स्थानांतरित करते थे।

ये उन्हें निशाना बनाते थे, जो साइबर अपराध से अन्जान थे। लोगों को भरोसे में लेकर या धोखे से अपना मोबाइल नंबर जुड़वा लेते थे, जिससे वास्तविक खाताधारक को यही पता नहीं चलता कि उसके खाते में कितनी राशि आ-जा रही है।

ऐसे करें बचाव

  • अपना एटीएम कार्ड, चेक बुक, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग का आइडी, पासवर्ड और ओटीपी किसी से साझा नहीं करें।
  • घर बैठे कमाई, कमीशन के बदले खाता उपयोग, पैसे ट्रांसफर कर कमीशन पाएं, जैसे आफर स्वीकार नहीं करें। अन्जान व्यक्ति खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहे तो तुरंत मना करें।
  • अपना खाता किसी और के दस्तावेज से न खुलवाएं। आधार-पैन की कापी साझा नहीं करें।
  • खाते में अन्जान राशि आए या कोई संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखे तो तुरंत पुलिस को बताएं।
  • साइबर अपराध होने की स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
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