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एमपी पुलिस बनेगी ‘स्मार्ट’: अब एआई (AI) सिखाएगा ड्रिल और वर्चुअल दुनिया में होगी फायरिंग; नए ट्रेनिंग मॉड्यूल की तैयारी

भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस अब अपराधियों से दो कदम आगे रहने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेने जा रही है। 2025 के नए बैच से आरक्षकों को न केवल थानों की कार्यप्रणाली सिखाई जाएगी, बल्कि उन्हें फेशियल रिकग्नीशन और वर्चुअल फायरिंग जैसे आधुनिक विषयों में भी एक्सपर्ट बनाया जाएगा। एडीजी (ट्रेनिंग) राजाबाबू सिंह ने इस संबंध में डीजीपी को विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।

प्रमुख बिंदु (HighLights):

  • एआई ड्रिल मास्टर: अब ड्रिल के दौरान एआई तकनीक आरक्षकों की मुद्रा (पोस्चर) और गलतियां पकड़ेगी।

  • वर्चुअल फायरिंग: भीड़भाड़, जंगल और पहाड़ों जैसे चुनौतीपूर्ण हालातों में बिना जोखिम के ‘सिम्युलेटर’ पर होगी फायरिंग की प्रैक्टिस।

  • डिजिटल सैंड मॉडल: बीएसएफ की तर्ज पर 3-डी और ऑडियो-विजुअल तकनीक से सिखाई जाएगी रणनीति।

  • मई से लागू: 7,500 आरक्षकों के नए बैच (2025) को इसी आधुनिक पद्धति से प्रशिक्षित करने की तैयारी।


ट्रेनिंग में जुड़ेंगे ये 4 नए ‘ब्रह्मास्त्र’

नया विषय/मॉड्यूल क्या होगा फायदा?
AI आधारित सर्विलांस सीसीटीवी और बॉडी कैमरों से संदिग्धों की सटीक पहचान (Facial Recognition) करना।
वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर सुरक्षित वातावरण में असली जैसे (Real-time) चुनौतीपूर्ण हालातों में गोली चलाने का अभ्यास।
डिजिटल सैंड मॉडल किसी भी ऑपरेशन या कानून-व्यवस्था की स्थिति को 3-डी मॉडल के जरिए बेहतर समझना।
स्मार्ट आउटडोर ट्रेनिंग एआई तकनीक प्रशिक्षु की ड्रिलिंग और फिजिकल ट्रेनिंग का विश्लेषण कर सुधार बताएगी।

अपराधियों के ‘डीपफेक’ और ‘एआई’ हमलों का जवाब

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, अपराधी अब अपराध करने के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में पुलिस के लिए ‘कंप्यूटर अवेयरनेस और साइबर सिक्योरिटी’ का पुराना कोर्स काफी नहीं है। अब इसमें एआई टूल्स को शामिल किया जा रहा है ताकि आरक्षक वीडियो, इमेज और ऑडियो एनालिसिस के माध्यम से संदिग्धों को चंद सेकेंडों में पहचान सकें।


सुरक्षित और सटीक होगी ‘फायरिंग प्रैक्टिस’

अक्सर देखा जाता है कि मैदान में फायरिंग प्रैक्टिस के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों का अनुभव नहीं मिल पाता।

  • 3-डी अनुभव: वर्चुअल सिम्युलेटर के जरिए आरक्षकों को यह सिखाया जाएगा कि भीड़ के बीच आत्मरक्षा में या अपराधी पर गोली चलाते समय किन बारीकियों का ध्यान रखना है।

  • शून्य जोखिम: इससे दुर्घटनाओं का खतरा खत्म होगा और जवानों का आत्मविश्वास बढ़ेगा।


विशेषज्ञ का बयान

“पुलिस को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में एआई जैसे विषयों को जोड़ने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे हमारी पुलिसिंग तकनीक आधारित और ज्यादा सटीक होगी।”

राजाबाबू सिंह, एडीजी (प्रशिक्षण)


निष्कर्ष: ‘टेक्नो-पुलिस’ की ओर बढ़ते कदम

मई 2026 तक जॉइन करने वाले 7,500 नए जवान मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास के सबसे ‘टेक-सैवी’ (तकनीकी रूप से सक्षम) आरक्षक होंगे। यह बदलाव न केवल जांच की प्रक्रिया को तेज करेगा, बल्कि आम जनता को भी अधिक सुरक्षित और आधुनिक पुलिसिंग का अनुभव मिलेगा।

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