भोपाल: राजधानी की झीलों और नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए भोपाल नगर निगम ने युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। शहर के 10 प्रमुख नालों पर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए जाएंगे। इस ₹213.75 करोड़ की मेगा परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर के रोजाना निकलने वाले 360 मिलियन लीटर (MLD) सीवेज को पूरी तरह उपचारित करना है।
प्रमुख बिंदु (HighLights):
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क्षमता में भारी इजाफा: सीवेज उपचार क्षमता 119 MLD से बढ़कर सीधे 290 MLD तक पहुँच जाएगी।
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तालाबों को राहत: बड़े तालाब, छोटे तालाब और बेतवा नदी में गिरने वाला 10 नालों का गंदा पानी अब पहले साफ़ होगा।
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भानपुर में सबसे बड़ा प्लांट: पातरा नाले को साफ़ करने के लिए भानपुर में 60 MLD का विशाल प्लांट लगेगा।
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कुल 27 प्लांट: नए 10 प्लांट जुड़ने के बाद भोपाल में एसटीपी की कुल संख्या 27 हो जाएगी।
सीवेज का गणित: अब नहीं बहेगी गंदगी
वर्तमान में भोपाल के सीवेज प्रबंधन की स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन अमृत-2.0 इसे पूरी तरह बदल देगा:
| विवरण | वर्तमान स्थिति | नई परियोजना के बाद |
| कुल STP संख्या | 17 | 27 |
| स्थापित क्षमता | 204 MLD | 375 MLD |
| वास्तविक उपचार | ~119 MLD | ~290 MLD |
| बिना उपचार का सीवेज | ~240 MLD | न्यूनतम (काफी कम) |
कहाँ-कहाँ लगेंगे नए ‘सफाई केंद्र’?
नगर निगम ने शहर के उन हिस्सों को चुना है जहाँ से सबसे ज्यादा गंदगी जल स्रोतों में मिल रही है:
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भानपुर (60 MLD): पातरा नाले के प्रदूषण को रोकने के लिए सबसे बड़ा केंद्र।
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बावड़िया कलां (32 MLD): बढ़ती आबादी के सीवेज प्रबंधन के लिए।
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खजूरी कलां (20 MLD): नए विकसित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण।
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अन्य क्षेत्र: चार इमली, समरधा, माता मंदिर, बाणगंगा, अरहेड़ी, एकांत पार्क और कोटरा में भी छोटे-बड़े प्लांट प्रस्तावित हैं।
पर्यावरण और जल गुणवत्ता पर असर
अभी तक प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि शोधन क्षमता कम होने के कारण गंदा पानी सीधे प्राकृतिक जल स्रोतों में जा रहा था।
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बेतवा नदी का संरक्षण: बेतवा में मिलने वाले नालों पर लगाम लगने से नदी का जल स्तर और गुणवत्ता दोनों सुधरेंगे।
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जलीय जीवन: तालाबों में ऑक्सीजन लेवल बढ़ेगा, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों को सुरक्षा मिलेगी।
प्रशासनिक दृष्टिकोण
“अमृत-2.0 के तहत लगाए जा रहे ये नए प्लांट भोपाल के सीवेज प्रबंधन के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे। हमारा लक्ष्य है कि शहर का एक बूंद गंदा पानी भी बिना उपचार के जल स्रोतों में न जाए।”
— संस्कृति जैन, निगमायुक्त, भोपाल
निष्कर्ष: ‘झीलों के शहर’ की पुरानी चमक होगी बहाल
₹213 करोड़ का यह निवेश न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि भोपाल की आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल और बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित करेगा। समय पर इन प्लांट्स का शुरू होना शहर की स्वच्छता रैंकिंग में भी बड़ा उछाल ला सकता है।




