नई दिल्ली/तेल अवीव: भारत और इजराइल के बीच रक्षा संबंधों ने एक नया इतिहास रच दिया है। इजराइल की ओर से आए एक बड़े दावे के मुताबिक, अब भारत की मदद से इजराइल अपने सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) को और मजबूती देगा। इस प्रोजेक्ट में भारतीय तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हाथ होगा। जहाँ सरकार इसे ‘मेक इन इंडिया’ की वैश्विक जीत बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए हैं।
क्या है इजराइल का दावा?
इजराइली रक्षा सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में आयरन डोम के कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स (पुर्जे) भारत में तैयार किए जाएंगे। इसका मतलब है कि भारत की 140 करोड़ की आबादी के हुनर और श्रम का इस्तेमाल इजराइल की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए होगा। यह सहयोग मिसाइल डिफेंस सिस्टम के उत्पादन की गति को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
विपक्ष का वार: ‘देश को बेचने’ जैसा आरोप
इस खबर के बाहर आते ही सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कुछ हलकों में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए इसे ‘देश के हितों से समझौता’ बताया जा रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि भारतीय संसाधनों का इस्तेमाल दूसरे देश के युद्ध और सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।
सरकार का पक्ष: ‘डिफेंस एक्सपोर्ट हब’ बनेगा भारत
वहीं, सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह ‘देश बेचना’ नहीं, बल्कि भारत को दुनिया का ‘डिफेंस एक्सपोर्ट हब’ बनाना है।
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रोजगार: इस प्रोजेक्ट से हजारों भारतीयों को हाई-टेक डिफेंस सेक्टर में नौकरियां मिलेंगी।
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टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: भारत को इजराइल की अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक सीखने का मौका मिलेगा।
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अर्थव्यवस्था: अरबों डॉलर का निवेश भारत में आएगा।




