पीड़िताओं के अनुसार, वे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलने के बाद साहस जुटाकर पुलिस थाने पहुंची थीं। लेकिन वहां उन्हें सहयोग के बजाय अपमान और भय का सामना करना पड़ा। इससे वे बेहद आहत हुईं।
बयान में नामित लोगों पर कार्रवाई नहीं
पीड़िताओं का यह भी आरोप है कि एफआईआर में दर्ज छह आरोपियों के अलावा उन्होंने अपने बयान में कुछ अन्य लोगों के नाम भी स्पष्ट रूप से बताए थे। इसके बावजूद उन व्यक्तियों को अब तक आरोपी नहीं बनाया गया।
उनका आरोप है कि दुष्कर्म के मुख्य आरोपियों के सहयोगियों को बचाने की कोशिश की गई। विशेष रूप से मुख्य आरोपी अमरीन और आफरीन की बहन फिजा के पति पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ड्रग पार्टी में दुष्कर्म का आरोप
30 वर्षीय पीड़िता का कहना है कि फिजा का पति ड्रग पार्टियों का आयोजन करता था। इन पार्टियों में ही उसके साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। पीड़िता ने पुलिस को इस संबंध में विस्तृत बयान दिया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी भी दी।
इसके बावजूद अब तक उस व्यक्ति के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता का आरोप है कि उसने कोर्ट परिसर में भी पुलिस की मौजूदगी में उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
धमकी के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
पीड़िता का कहना है कि धमकी देने वाले युवक से पुलिस ने पूछताछ तो की, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। इस कारण पीड़िताओं में असुरक्षा की भावना बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें न्याय मिलना मुश्किल हो जाएगा।
मामले में अब तक हुई कार्रवाई
25 वर्षीय युवती और 30 वर्षीय हिंदू महिला की शिकायत पर बागसेवनिया पुलिस ने मतांतरण और दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड अमरीन, उसकी बहन आफरीन और प्रेमी चंदन यादव को गिरफ्तार किया है।
पीड़िताओं का आरोप है कि अमरीन और आफरीन ने उन्हें घर में बेबी केयरटेकर की नौकरी का झांसा दिया था। इसके बाद उन्हें अपने भाई और प्रेमी के सामने पेश किया गया, जहां उनके साथ दुष्कर्म किया गया।
पीड़िताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बाद में देह व्यापार में धकेल दिया गया। साथ ही अमरीन और आफरीन पर देह व्यापार से मिले पैसों के गबन का भी आरोप लगाया गया है।
तीन आरोपी अब भी फरार
पुलिस अब तक मामले में आरोपी अमरीन के भाई बिलाल, दोस्त चानू और मंगेतर यासिर को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। तीनों आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
जांच के लिए SIT का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह टीम पूरे घटनाक्रम की पुनः समीक्षा करेगी।
SIT को पीड़िताओं के आरोपों, फरार आरोपियों की तलाश और अब तक हुई कार्रवाई की पारदर्शिता की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फरार आरोपितों की तलाश के लिए पुलिस टीमें जुटी हैं। एक टीम ने अहमदाबाद में भी दबिश दी, लेकिन आरोपित किसी तरह भाग निकले। रही बात मिसरोद थाने में शिकायत पर पुलिस ने जांच न करते हुए वहां से मामले की जानकारी एसीपी आफिस में दी थी, जिसके बाद जांच कर उसी केस को बागसेवनिया थाने में दर्ज करवाया गया है।
विवेक सिंह, डीसीपी जोन-2




