भोपाल/नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश सरकार उद्यानिकी फसलों के विस्तार के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। इसके तहत मखाना, सिंघाड़ा और ब्रोकली जैसी हाई-वैल्यू फसलों को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर महोत्सवों का आयोजन किया जाएगा। ये आयोजन भोपाल, इंदौर और नर्मदापुरम में होंगे, जहाँ विशेषज्ञ किसानों को तकनीक और निर्यात के गुर सिखाएंगे।
1. मखाना उत्पादन: 4 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट
जलीय फसल मखाना अब मध्य प्रदेश के तालाबों की रौनक बढ़ाएगा। सरकार ने नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना है।
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बजट और लक्ष्य: 150 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती विकसित करने के लिए ₹45 लाख का प्रावधान।
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बड़ा अनुदान: किसानों को लागत का 40% या अधिकतम ₹75,000 प्रति हेक्टेयर तक की सब्सिडी मिलेगी।
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विस्तार: अगले चरण में जबलपुर, कटनी, रीवा और सतना जैसे 10 और जिलों को जोड़ा जाएगा।
2. सिंघाड़ा और सब्जी महोत्सव: आय बढ़ाने का जरिया
सरकार ने किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए विशेष कैलेंडर तैयार किया है:
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मखाना और सिंघाड़ा महोत्सव: मई के तीसरे सप्ताह में नर्मदापुरम में प्रस्तावित।
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सब्जी महोत्सव: अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में इंदौर में आयोजित होगा।
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सब्जी उत्पादन में उछाल: प्रदेश में सब्जी उत्पादन 236 लाख टन से बढ़कर 257 लाख टन तक पहुँच गया है। अब ब्रोकली, चेरी टमाटर और रंगीन शिमला मिर्च जैसी विदेशी सब्जियों पर फोकस किया जा रहा है।
प्रमुख योजनाओं और उत्पादन का संक्षिप्त विवरण
| फसल | मुख्य जिले | अनुदान/उत्पादन लक्ष्य |
| मखाना | नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा, सिवनी | ₹75,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान |
| सिंघाड़ा | भोपाल (बिशनखेड़ी), छतरपुर, रीवा, सतना | 2,739 हजार टन (अनुमानित उत्पादन) |
| विदेशी सब्जियां | इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, देवास, खंडवा | ब्रोकली, सलाद पत्ता, रंगीन शिमला मिर्च |
मखाना खेती की तकनीकी बारीकियां
मखाना उन किसानों के लिए वरदान है जिनके खेतों में पानी भरा रहता है या जिनके पास तालाब हैं।
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अनुकूल दशाएं: तालाब या 2-3 फीट गहरे पानी वाले खेत।
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समय चक्र: दिसंबर-जनवरी में बुवाई और 6 महीने में फसल तैयार।
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प्रक्रिया: फूल आने के बाद बीज तालाब की सतह पर गिरते हैं, जिन्हें निकालकर सुखाया और भुना जाता है।
मखाना बोर्ड का गठन और ग्लोबल डिमांड
मखाने की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने मखाना बोर्ड का गठन किया है। भारत से मखाने का निर्यात अब अरब देशों और यूरोप तक फैल रहा है, जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल जलभराव वाली बेकार पड़ी भूमि का सदुपयोग करेगी, बल्कि मखाना और सिंघाड़ा जैसे ‘सुपरफूड’ के जरिए किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगी।




