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भोपाल के आदमपुर में कचरे का 60 फीट ऊंचा ‘टाइम बम’, आग से 15 गांवों में सांसों का ‘आपातकाल’

 

भोपाल। आदमपुर छावनी स्थित कचरा खंती अब प्रबंधन का केंद्र नहीं, बल्कि भोपाल के लिए एक “टाइम बम” बन चुका है, जो हर कुछ दिनों में जहरीले धुएं के साथ फटता है। पिछले 18 महीनों में 12वीं बार लगी आग ने यह साफ कर दिया है कि नगर निगम का “वैज्ञानिक प्रबंधन” केवल फाइलों तक सीमित है।

यह आग केवल कचरा नहीं जला रही, बल्कि आसपास के 12 से 15 गांवों के रहवासियों की सांसों और भविष्य को राख कर रही है। डॉक्टरों की टीम द्वारा की गई लोगों के स्वास्थ्य जांच में इस खौफनाक हकीकत पर मुहर लगा दी है।

 

गर्मी के मौसम में लगने वाली आग को रोकने का कोई उपाय नहीं

जांच में बड़ी संख्या में लोग आंख, पेट और त्वचा से जुड़ी गंभीर बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, हवा में मौजूद जहरीले कण और दूषित भू-जल इन बीमारियों की मुख्य वजह हैं। वहीं, निगम के अधिकारियों का कहना है कि हम कचरे का खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में लगने वाली आग को रोकने का कोई उपाय नहीं है।

मीथेन गैस डिटेक्टर से गैस का पाता लगाया जाना चाहिए

दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि कचरा खंती में मीथेन गैस डिटेक्टर से गैस का पाता लगाया जाना चाहिए। पुराने कचरे में आग लगने से रोकने के लिए कचरे के ऊपर पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए। साथ ही कचरे के ऊपर निर्माण सामग्री (सीएंडटी वेस्ट) का डालकर परत को बंद किया जाना चाहिए, ताकि गैस बाहर न निकले।

यदि आग लगती है तो निर्माण मटेरियल से उसे बुझाया जाना चाहिए, लेकिन खंती में आग बुझाने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है।

आग और पानी का दोहरा प्रहार

जब कचरे के ढेर में आग लगती है, तो निकलने वाला जहरीला धुआं न केवल आसपास के गांवों बल्कि पूरी राजधानी के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) को खराब कर देता है। वहीं, जब इस आग को बुझाने के लिए लाखों लीटर पानी का छिड़काव किया जाता है, तो वह पानी कचरे के जहरीले तत्वों (लीचेट) को सोखकर जमीन के गहरे स्तर तक ले जाता है। इससे क्षेत्र का भू-जल पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे लोगों में पेट की बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं।

‘वैज्ञानिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही’

पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे का कहना है कि आदमपुर खंती में वैज्ञानिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जब तक यहां बायो-माइनिंग और प्रापर गैस वेंटिंग नहीं होगी, तब तक आग की घटनाएं नहीं रुकेंगी। कचरे को बुझाने के लिए डाला गया पानी “जहरीले तरल” के रूप में रिसकर राजधानी के भविष्य के जल स्रोतों को खत्म कर रहा है। यह एक गंभीर पर्यावरणीय अपराध है जिस पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है

कचरा खंती में आग लगने से उठने वाला धुआं आसपास के गांवों के साथ ही राजधानी की आबोहवा को भी प्रभावित कर रहा है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। कुछ समय जेपी अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने आसपास के गांवों के रहवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया था, जिसमें लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित मिले थे।

आग लगने से रोकने का तो कोई उपाय नहीं किया है, लेकिन आग बुझाने के लिए हमने कचरा खंती पर चार दमकल तैनात कर रखीं हैं। बीते दिन लगी आग पर भी 15 से 20 मिनट में ही हमने काबू पा लिया था। हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्द ही कचरा का निपटान का काम शुरू किया जाए।

– संस्कृति जैन, निगमायुक्त

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