भोपाल में प्रदर्शन से पहले पुलिस की ‘NOC’ अनिवार्य: बिना अनुमति रैली या पुतला दहन किया तो सीधे होगी FIR
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी में अब अपनी मांगें उठाना उतना आसान नहीं होगा। पुलिस प्रशासन ने शहर की शांति व्यवस्था को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी तरह के धरना, प्रदर्शन, जुलूस या रैली के लिए पुलिस की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने नए कानून (BNSS) के तहत इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
मुख्य बिंदु (HighLights)
- 🚩 कड़ा पहरा: बिना अनुमति आयोजन करने पर आयोजकों पर होगी सख्त कार्रवाई।
- 🚫 बैन: हथियार, विस्फोटक और मशाल जुलूस निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध।
- ⏳ समय सीमा: यह प्रतिबंधात्मक आदेश अगले दो माह तक प्रभावी रहेगा।
- 📉 डेटा: शहर में रोजाना औसतन 3 से 5 विरोध प्रदर्शन दर्ज होते हैं।
अनुमति के बिना आयोजन पर होगी कड़ी कार्रवाई
नए आदेश के मुताबिक, किसी भी संगठन या राजनीतिक दल को धरना, रैली, पदयात्रा, वाहन रैली या पुतला दहन करने से पहले पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा) से परमिशन लेनी होगी। यदि बिना अनुमति कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा, तो उसकी भरपाई सीधे आयोजकों से की जाएगी।
हथियार और भड़काऊ भाषण पर ‘नो टॉलरेंस’
पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से स्पष्ट किया है कि किसी भी आयोजन में हथियार या विस्फोटक लाना प्रतिबंधित है। इसके साथ ही, किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले भाषण या पंपलेट बांटने पर तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है। मशाल जुलूस पर भी सुरक्षा कारणों से रोक लगाई गई है।
प्रदर्शनों का शहर: एक नजर में
| प्रदर्शन का प्रकार | दैनिक औसत |
|---|---|
| सामान्य विरोध प्रदर्शन | 3 से 5 कार्यक्रम |
| चुनावी या भर्ती आंदोलन के समय | 10 से 15 कार्यक्रम |
अग्रसर इंडिया का सवाल: राजधानी में होने वाले रोजाना के प्रदर्शनों से जनता को जाम और शोर से मुक्ति मिलेगी या यह अभिव्यक्ति की आजादी पर एक नई पाबंदी है? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।




