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भोपाल में ‘पाताल’ से गुजरेगी मेट्रो… 15 मीटर नीचे उतरी टीबीएम मशीन, पुराने शहर में शुरू होगा सुरंग का काम

भोपाल में ‘पाताल’ से गुजरेगी मेट्रो: पुरानी बसावट के नीचे सुरंग बनाने की तैयारी, 15 मीटर गहराई में उतरी विशालकाय मशीन

भोपाल: राजधानी की महत्वाकांक्षी मेट्रो रेल परियोजना अब अपने सबसे रोमांचक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण चरण में पहुंच गई है। भोपाल मेट्रो की ‘ऑरेंज लाइन’ के तहत शहर के सबसे व्यस्त इलाकों के नीचे से 3.39 किलोमीटर लंबा भूमिगत कॉरिडोर (Underground Corridor) तैयार किया जा रहा है। इस ‘पाताल’ मार्ग के निर्माण के लिए भारी-भरकम टनल बोरिंग मशीन (TBM) को जमीन के नीचे उतारने का काम शुरू हो चुका है।

मुख्य बिंदु (HighLights):

  • अंडरग्राउंड कॉरिडोर: भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक 3.39 किमी लंबी जुड़वां सुरंग (Twin Tunnel) बनेगी।

  • टीबीएम की एंट्री: क्रेन के जरिए मशीन का पहला बड़ा हिस्सा जमीन से 15 मीटर नीचे लॉन्चिंग शाफ्ट में उतारा गया।

  • शुरुआत: मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह से सुरंग की खुदाई का काम विधिवत शुरू होगा।

  • तकनीकी कमाल: जमीन के 20 मीटर नीचे खुदाई होगी, लेकिन ऊपर ट्रैफिक और इमारतों को भनक तक नहीं लगेगी।


बेंगलुरु से आई ‘टीबीएम’ रचेगी इतिहास

सुरंग बनाने वाली यह अत्याधुनिक टीबीएम मशीन दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल लाई गई थी। मशीन के तीन से चार मुख्य हिस्से हैं, जिन्हें बारी-बारी से क्रेन के जरिए नीचे उतारा जा रहा है। पूरी तरह असेंबल होने के बाद यह मशीन जमीन के अंदर 19 से 20 मीटर की गहराई पर जाकर रास्ता बनाएगी।

बिना शोर और कंपन की खुदाई: मेट्रो प्रबंधन का दावा है कि टीबीएम तकनीक इतनी उन्नत है कि खुदाई के दौरान जमीन के ऊपर किसी भी प्रकार का कंपन (Vibration) महसूस नहीं होगा। भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे घने इलाकों के नीचे काम चलने के बावजूद जनजीवन सामान्य बना रहेगा।


पुरानी इमारतों और विरासत को बचाने की चुनौती

प्रोजेक्ट पैकेज BH-04 के तहत सुरंग का रास्ता पुल पातरा और सिंधी कॉलोनी जैसे क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। यहाँ की सबसे बड़ी चुनौती सदियों पुरानी जर्जर इमारतें और संकरी गलियां हैं।

  • सुरक्षा ऑडिट: प्रबंधन उन इमारतों और होटलों की विशेष निगरानी कर रहा है जो तकनीकी रूप से कमजोर हैं।

  • अंडरग्राउंड रैंप: पुल पातरा और सिंधी कॉलोनी के बीच एक विशाल अंडरग्राउंड रैंप बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से मेट्रो ट्रेन जमीन के ऊपर (Elevated) से भूमिगत स्टेशन में प्रवेश करेगी।


निष्कर्ष: बदल जाएगी भोपाल की तस्वीर

भूमिगत मेट्रो का यह सफल प्रयोग भोपाल की ऐतिहासिक विरासत को बचाते हुए उसे आधुनिक परिवहन से जोड़ने का काम करेगा। व्यस्त रास्तों पर बिना ट्रैफिक जाम किए सुरंग बनाने की यह प्रक्रिया शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

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