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भोपाल मेट्रो पर कब्रिस्तान का ब्रेक, वक्फ अधिकरण ने मांगा नया रूट प्लान, मकान बचाएं या कब्रिस्तान मेट्रो प्रबंधन की बढ़ी मुश्किलें

 

Bhopal Metro News Update: राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण ऑरेंज लाइन का काम एक बड़ी दुविधा में फंस गया है। अंडरग्राउंड कॉरिडोर के रैंप नि …और पढ़ें

 

भोपाल मेट्रो पर कब्रिस्तान का ब्रेक, वक्फ अधिकरण ने मांगा नया रूट प्लान, मकान बचाएं या कब्रिस्तान मेट्रो प्रबंधन की बढ़ी मुश्किलें

भोपाल मेट्रो पर कब्रिस्तान का ब्रेक, वक्फ अधिकरण ने मांगा नया रूट प्लान

HighLights

  1. मेट्रो के वर्तमान रूट प्लान पर सख्त आपत्ति जताई
  2. विधायक आतिफ डिजाइन में बदलाव की मांग पर अड़े
  3. रैंप को दूसरी तरफ शिफ्ट करने पर तोड़ने होंंगे कई मकान

भोपाल। राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण ऑरेंज लाइन का काम एक बड़ी दुविधा में फंस गया है। अंडरग्राउंड कॉरिडोर के रैंप निर्माण को लेकर बड़ा बाग कब्रिस्तान और शाही औकाफ की जमीन पर विवाद गहराता जा रहा है।

एक तरफ विधायक आतिफ अकील कब्रिस्तान को बचाने के लिए डिजाइन में बदलाव की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि वैकल्पिक मार्ग अपनाने पर दर्जनों नागरिकों के घर ढहाने पड़ेंगे।

मेट्रो के वर्तमान रूट प्लान पर सख्त आपत्ति जताई

बुधवार को इस विवाद ने तब नया मोड़ ले लिया, जब वक्फ अधिकरण के सदस्य हसन जैदी की अगुवाई में एक दल ने शाही और बड़ा बाग कब्रिस्तान का स्थलीय निरीक्षण किया। मौके पर मौजूद विधायक आतिफ अकील और शाही औकाफ के प्रतिनिधियों ने मेट्रो के वर्तमान रूट प्लान पर सख्त आपत्ति जताई।

 

उनका तर्क है कि प्रस्तावित रैंप से पुरानी कब्रें प्रभावित होंगी। इसके जवाब में अधिकरण ने मेट्रो कंपनी को 15 फरवरी तक नया और वैकल्पिक प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मकान बचाएं या कब्रिस्तान, प्रबंधन की बढ़ी मुश्किल

मेट्रो प्रबंधन के लिए यह स्थिति एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई जैसी हो गई है। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक यदि रैंप को सड़क के दूसरी तरफ शिफ्ट किया जाता है, तो करीब 35-36 निजी मकानों को तोड़ना होगा, जिसके लिए वहां के रहवासी बिल्कुल तैयार नहीं हैं। वहीं, विधायक का सुझाव है कि रूट ऐसा हो, जिससे किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान न पहुंचे।

न्यायालय की अवमानना का मुद्दा भी गरमाया

इस खींचतान के बीच सिंधी कॉलोनी क्षेत्र में यथा स्थिति के आदेश के बावजूद काम जारी रहने पर न्यायालय की अवमानना का मुद्दा भी गरमा गया है। फिलहाल, शहर काजी और जिला प्रशासन के बीच बैठकों का दौर जारी है, लेकिन समाधान की पटरी अभी तक नजर नहीं आ रही है।

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