कूनो में बढ़ेगा चीतों का कुनबा:
श्योपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन परियोजना एक नए अध्याय की ओर बढ़ रही है। आगामी 28 फरवरी को बोत्सवाना से आठ और चीते मध्य प्रदेश लाए जाएंगे। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2032 तक लगभग 17 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 60 से 70 चीतों की एक आत्मनिर्भर और सुरक्षित आबादी स्थापित करना है।
शावकों के जन्म से मिली बड़ी सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई इस परियोजना को विश्व का सबसे सफल वन्यजीव अभियान माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2026 के बीच कूनो में कुल 39 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 27 शावक पूरी तरह स्वस्थ और जीवित हैं। वर्तमान में कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या ‘प्रकृति से प्रगति’ के संदेश को चरितार्थ कर रही है।
विशिष्ट अतिथियों का होगा आगमन, तैयारियां तेज बोत्सवाना से आने वाले इन नए मेहमानों के स्वागत के लिए कूनो नेशनल पार्क में बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, बोत्सवाना के राष्ट्राध्यक्ष डुमा बोका और केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव मौजूद रहेंगे। अति विशिष्ट अतिथियों के आवागमन के लिए पार्क परिसर में पांच हेलीपैड तैयार किए गए हैं, जहां वायुसेना के अधिकारियों की देखरेख में ट्रायल भी पूरा कर लिया गया है।
बोत्सवाना से आ रहीं दो मादा चीते और छह शावक परियोजना के अगले चरण में बोत्सवाना से दो वयस्क मादा चीते और उनके छह शावकों को लाया जा रहा है। इससे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 और 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे। चीतों के संरक्षण को और मजबूती देने के लिए गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में भी एक विशेष संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित करने की योजना है।
रणनीति: 2032 तक आत्मनिर्भर आबादी का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश अब वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का केंद्र बन चुका है। सरकार की रणनीति केवल चीतों की संख्या बढ़ाना ही नहीं, बल्कि एक ऐसा ईको-सिस्टम विकसित करना है जहां ये वन्यजीव बिना मानवीय हस्तक्षेप के फल-फूल सकें।




